विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: सूर्यांश धाम खोखरा में खिले गुलमोहर, पौधारोपण और संरक्षण का दिख रहा सकारात्मक परिणाम

सूर्यांश शिक्षा उत्थान समिति के पौधारोपण अभियान ने बदली तस्वीर, सामूहिक विवाह में नवदंपत्तियों को भी दिलाई जाती है पर्यावरण संरक्षण की शपथ
🔴 Aaj Ki Baat News | जांजगीर-चांपा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। सूर्यांश शिक्षा उत्थान समिति द्वारा वर्षों से किए जा रहे पौधारोपण और संरक्षण अभियान के चलते सूर्यांश धाम खोखरा में लगाए गए गुलमोहर सहित कई पौधे अब वृक्ष का रूप धारण कर फूलों से लहलहा रहे हैं।
समिति द्वारा शिक्षा, सामाजिक उत्थान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष वर्षा ऋतु की शुरुआत में वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जाता है। सूर्यांश प्रांगण सिवनी (नैला) एवं सूर्यांश धाम खोखरा में लगाए गए पौधे अब तेजी से विकसित हो रहे हैं।
पौधारोपण के साथ संरक्षण पर भी विशेष ध्यान
सूर्यांश धाम खोखरा में विगत वर्षों में छायादार, फूलदार एवं फलदार पौधों का बड़े स्तर पर रोपण किया गया है। पौधों की सुरक्षा के लिए कांटेदार तार से घेराबंदी की गई है। भीषण गर्मी और नवतपा के दौरान भी पौधों को नियमित पानी और सिंचाई उपलब्ध कराई जा रही है।
यहां पीपल, बरगद, नीम, जामुन, अमरूद, गुलमोहर, करंज, दूधमोंगरा और कनेर सहित अनेक प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनमें से कई पौधे अब बड़े होकर फूल और फल देने लगे हैं। विशेष रूप से गुलमोहर के पेड़ों पर खिले फूल पर्यावरण प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सामूहिक विवाह में भी दिया जाता है पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सूर्यांश शिक्षा उत्थान समिति के संरक्षक एवं शिक्षाविद प्रो. गोवर्धन सूर्यवंशी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर अपने संदेश में कहा कि शिक्षा और समाज कल्याण के साथ पर्यावरण संरक्षण भी संस्था की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष पौधारोपण किया जाता है और लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण का संकल्प लिया जाता है।
उन्होंने कहा कि “सूर्यांश सामूहिक आदर्श गौरव विवाह” में शामिल होने वाले प्रत्येक वैवाहिक जोड़े को पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई जाती है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंच सके।
अधिक पौधारोपण समय की जरूरत – हरदेव टंडन
समिति के संरक्षक हरदेव टंडन ने कहा कि शिक्षा के साथ पर्यावरण जागरूकता और संरक्षण का कार्य हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जांजगीर जैसे मैदानी क्षेत्र में वन क्षेत्र अपेक्षाकृत कम है, इसलिए अधिक से अधिक पौधारोपण कर उनका संरक्षण और संवर्धन करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य को देखते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के साथ उसकी देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए, तभी हरित और स्वच्छ भविष्य का निर्माण संभव होगा।




