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हिंद मल्टी सर्विसेज परियोजना की स्वतंत्र जांच और स्वीकृति स्थगन की मांग, दीपक दुबे ने उठाए 53 गंभीर सवाल

कोल वॉशरी विस्तार और 25 मेगावाट पावर प्लांट परियोजना पर पर्यावरण, जल संसाधन और जनस्वास्थ्य को लेकर जताई चिंता

🔴 Aaj Ki Baat News | बलौदा, जांजगीर-चांपा

भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ के संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे ने ग्राम बिरगहनी स्थित हिंद मल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित कोल वॉशरी विस्तार एवं 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट परियोजना को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय पर्यावरणीय और नियामक संस्थाओं को 53 बिंदुओं का विस्तृत आपत्ति-पत्र सौंपते हुए परियोजना की स्वतंत्र जांच और सभी स्वीकृतियों को फिलहाल स्थगित रखने की मांग की है।

पर्यावरणीय और जल संसाधनों पर उठाए सवाल

दीपक दुबे का कहना है कि यह मामला केवल परियोजना विस्तार का नहीं, बल्कि पिछले लगभग एक दशक से संचालित औद्योगिक गतिविधियों के समग्र मूल्यांकन का विषय है। उन्होंने मांग की है कि परियोजना क्षेत्र और उसके प्रभाव क्षेत्र में जल उपलब्धता, भूजल दोहन, जल पुनर्भरण क्षमता, औद्योगिक जल उपयोग की वैधता तथा किसानों और ग्रामीणों पर संभावित प्रभाव का स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।

उन्होंने वाटर सिक्योरिटी असेसमेंट, हाइड्रोजियोलॉजिकल स्टडी, ग्राउंड वाटर ऑडिट और लॉन्ग टर्म वाटर सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट जैसी जांच राष्ट्रीय स्तर की स्वतंत्र संस्थाओं से कराने की मांग की है।

उत्पादन और राजस्व अभिलेखों की जांच की मांग

आपत्ति पत्र में परियोजना की स्थापना से अब तक के उत्पादन, कोयला परिवहन, रॉयल्टी भुगतान, जीएसटी रिटर्न, रेलवे रिकॉर्ड, ई-वे बिल और अन्य नियामकीय अभिलेखों का स्वतंत्र सत्यापन कराने की मांग की गई है। साथ ही कोयला, मिडलिंग, स्लरी और अन्य उप उत्पादों के भौतिक स्टॉक का डीजीपीएस सर्वे, ड्रोन सर्वे और जियो रेफरेंस्ड मैपिंग के माध्यम से सत्यापन कराने की भी मांग रखी गई है।

53 गांवों में पर्यावरण और स्वास्थ्य सर्वे की मांग

दीपक दुबे ने परियोजना के 10 किलोमीटर अध्ययन क्षेत्र में शामिल 53 गांवों में ग्रामवार पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, सामाजिक प्रभाव आकलन, जनस्वास्थ्य सर्वे और आजीविका प्रभाव अध्ययन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परियोजना के संभावित प्रभावों का मूल्यांकन केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रभावित ग्रामीणों, महिलाओं, बच्चों, किसानों और श्रमिकों की स्थिति का भी स्वतंत्र अध्ययन होना चाहिए।

प्रदूषण नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल

आपत्ति में परियोजना से जुड़े वायु गुणवत्ता, जल गुणवत्ता, शोर स्तर, उत्सर्जन निगरानी और अन्य पर्यावरणीय आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है। साथ ही ओसीईएमएस, सीईएमएस, भूजल निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों का थर्ड पार्टी सत्यापन कराने की भी मांग उठाई गई है।

दीपक दुबे ने ग्रीन बेल्ट, बैग फिल्टर, ईएसपी, वाटर स्प्रिंकलिंग सिस्टम, वर्षा जल संचयन संरचनाओं सहित सभी पर्यावरणीय शर्तों के पालन की संयुक्त जांच कराने की मांग की है।

फ्लाई ऐश प्रबंधन और श्रमिक सुरक्षा भी जांच के दायरे में

प्रस्तावित 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट से उत्पन्न होने वाली फ्लाई ऐश के सुरक्षित उपयोग और निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आपत्ति पत्र में फ्लाई ऐश प्रबंधन योजना, परिवहन व्यवस्था और पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र परीक्षण कराने की मांग की गई है।

इसके अलावा परियोजना में कार्यरत श्रमिकों, संविदा कर्मचारियों और परिवहन चालकों के पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण, श्रम कानून अनुपालन और श्रमिक कल्याण उपायों की जांच की मांग भी की गई है।

स्वीकृति रोकने की मांग

दीपक दुबे ने मांग की है कि सभी प्रस्तावित जांच, ऑडिट, सत्यापन और तकनीकी अध्ययन पूर्ण होने तथा उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने तक परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति, जल स्वीकृति, भूजल स्वीकृति, विस्तार अनुमति और प्रस्तावित 25 मेगावाट पावर प्लांट से संबंधित सभी स्वीकृतियां तत्काल प्रभाव से स्थगित रखी जाएं।

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