
हसदेव तट स्थित प्राचीन शिवालय में दर्शन-पूजन के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
🔴 Aaj Ki Baat News | जांजगीर-चांपा
श्रावण माह के पहले सोमवार को जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। जिले के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल ग्राम पीथमपुर स्थित बाबा कलेश्वरनाथ धाम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन, जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे।
हसदेव तट पर स्थित है प्राचीन शिवालय
जिला मुख्यालय जांजगीर से लगभग 10 किलोमीटर दूर हसदेव नदी के तट पर स्थित बाबा कलेश्वरनाथ धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर के पुजारी पंडित नरेश तिवारी के अनुसार, यहां स्थित शिवलिंग की स्थापना वर्ष 1698 में जगमाल गांगजी ने कराई थी। सावन माह और महाशिवरात्रि पर यहां प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
धार्मिक मान्यता से जुड़ी है आस्था
मंदिर के पुजारी पंडित नरेश तिवारी के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि बाबा कलेश्वरनाथ के दर्शन और सच्चे मन से की गई आराधना से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्रद्धालुओं का यह भी विश्वास है कि मंदिर की जलहरी के जल के प्रति आस्था रखने से पेट संबंधी कष्टों में राहत मिलती है तथा नि:संतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सावन में होती है विशेष पूजा-अर्चना
सावन माह के प्रत्येक सोमवार को मंदिर में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार, जलाभिषेक और महाआरती की जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए मंदिर प्रबंधन समिति और जिला प्रशासन आवश्यक व्यवस्थाएं करता है।
रंगपंचमी पर लगता है 15 दिवसीय मेला
मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष रंगपंचमी से 15 दिवसीय मेले का आयोजन होता है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से नागा साधु-संत सहित हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यह मेला क्षेत्र की धार्मिक परंपरा का प्रमुख आयोजन माना जाता है।
चांदी से अलंकृत है जलहरी
मंदिर के पुजारी के अनुसार, चांपा के एक शिवभक्त ने बाबा कलेश्वरनाथ की वेदी और जलहरी पर लगभग पांच किलोग्राम चांदी की परत चढ़वाई है, जिससे मंदिर की भव्यता और आकर्षण बढ़ा है।
धार्मिक मान्यता
मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता है कि बाबा कलेश्वरनाथ की जलहरी का जल श्रद्धा के साथ ग्रहण करने से पेट संबंधी कष्टों में राहत मिलती है तथा नि:संतान दंपतियों को संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी आस्था के कारण सावन माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।




