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नेपाल की तबाही में फंसे रायपुर के 5 दोस्त, चाय के 10 मिनट ने बचा दी जिंदगी

मलेखू में चाय के लिए रुके तो तेजी से बढ़ा बाढ़ का पानी, दो दिन ऊंचाई पर गुजारने के बाद सुरक्षित लौटे रायपुर

रायपुर। 29 अगस्त 2026। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच फंसे रायपुर के पांच दोस्त शनिवार को सुरक्षित अपने घर लौट आए। रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचते ही उन्होंने जमीन पर दंडवत प्रणाम किया और मातृभूमि की मिट्टी माथे से लगाई। पांचों ने बाबा पशुपतिनाथ और बाबा भंडारी के जयकारे लगाए। दोस्तों ने कहा कि वे नेपाल से जैसे दूसरी जिंदगी लेकर लौटे हैं। माना कैंप निवासी दिनेश सिंह ठाकुर, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन और यतेंद्र प्रकाश 21 अगस्त को धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल रवाना हुए थे। बाढ़ के बाद उन्हें करीब दो दिन ऊंचाई वाले इलाके में रहकर गुजारने पड़े। इस दौरान एक रात पांचों ने अपनी कार में भी बिताई।

चाय के लिए रुके और सामने आ गई तबाही

नारायण सेन और दिनेश ठाकुर के मुताबिक, वे मुक्तिनाथ से पोखरा होते हुए वापस लौट रहे थे। धड़िंग जिले के मलेखू कस्बे में सुबह करीब 9:30 बजे उन्हें चाय पीने की इच्छा हुई। होटल दिखाई देने पर उन्होंने गाड़ी रोक दी और करीब 10 से 15 मिनट वहां रुके। इसी दौरान भोटे कोशी और त्रिशूली नदी की घाटियों में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने लगा। दोस्तों का कहना है कि अगर वे कुछ मिनट पहले वहां से निकल गए होते तो तेज बहाव की चपेट में आ सकते थे। कुछ ही देर में रास्ते बंद होने लगे और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

आंखों के सामने बहती रहीं गाड़ियां और सामान

दिनेश ठाकुर ने बताया कि बाढ़ के बाद उन्हें आगे पुल बह जाने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने त्रिशूली नदी का रौद्र रूप अपनी आंखों से देखा। तेज बहाव में गाड़ियां, सामान और कई दूसरी चीजें बह रही थीं। कई जगह पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था और लोग अपने परिजनों की तलाश में परेशान नजर आ रहे थे। बिगड़े हालात के बीच पांचों दोस्तों ने मलेखू के ऊंचाई वाले इलाके में शरण ली। बाढ़ के कारण उन्हें करीब दो दिन वहीं रहना पड़ा।

भारतीय होटल संचालक ने दिया सहारा

दोस्तों ने बताया कि बाढ़ के दौरान वे काफी डर गए थे। जिस होटल में उन्होंने शरण ली थी, उसका संचालक भारतीय था। उसने उन्हें भोजन उपलब्ध कराया और सुरक्षित रहने में मदद की। इसके बाद पांचों ने ऊंचाई वाले इलाके में शरण ली। मुख्य रास्तों पर जाम और बाढ़ से हुई तबाही के बीच ड्राइवर अर्जुन ने हिम्मत बनाए रखी और वैकल्पिक रास्तों से वाहन निकालकर दोस्तों को सुरक्षित इलाके से बाहर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

नेपाल में महिला सुरक्षा कर्मियों ने बांधी राखी

दिनेश ठाकुर ने बताया कि उनकी वापसी रक्षाबंधन के बाद होनी थी। उनकी बहनों ने उन्हें पहले ही राखियां दे दी थीं। नेपाल में तैनात महिला सुरक्षा कर्मियों ने उनकी कलाई पर वही राखियां बांधीं। दोस्तों के मुताबिक, नेपाल में तबाही के बीच राखी का यह पल उनके लिए बेहद भावुक और सुकून देने वाला रहा।

पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद लौटे रायपुर

इस दौरान पांचों दोस्तों ने पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन भी किए। इसके बाद वे रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए। शनिवार दोपहर करीब 12:50 बजे पांचों दोस्त दुर्ग-नवतनवा एक्सप्रेस से रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। परिवार के सदस्य उन्हें लेने स्टेशन आना चाहते थे, लेकिन दोस्तों ने मना कर दिया। उनका कहना था कि लंबे और तनावपूर्ण सफर के बाद वे खुद घर पहुंचकर परिवार से मिलना चाहते हैं। रायपुर लौटते ही पांचों दोस्तों ने राहत की सांस ली। चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन नेपाल में देखी तबाही के दृश्य अब भी उनकी आंखों के सामने थे। उन्होंने कहा कि वहां जो कुछ देखा, उसे वे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे।

10 मिनट का ब्रेक बना जिंदगी बचाने वाला मोड़

मलेखू में चाय के लिए लिया गया 10-15 मिनट का ब्रेक उस समय महज एक सामान्य रुकना लगा था। लेकिन बाद में दोस्तों को एहसास हुआ कि इसी दौरान बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ गया। उनका मानना है कि अगर वे कुछ मिनट पहले वहां से निकल गए होते तो हालात बेहद भयावह हो सकते थे।

इसी अनुभव के चलते पांचों दोस्त उस छोटे से ब्रेक को अपनी जिंदगी का ऐसा मोड़ मान रहे हैं, जिसने उन्हें नेपाल की बाढ़ के बीच सुरक्षित घर लौटने का मौका दिया।

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