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किसानों को अब मोबाइल टोकन से मिलेगी खाद: जिले में FFS सॉफ्टवेयर से उर्वरक वितरण शुरू, समितियों और दुकानों की भीड़ से मिलेगी मुक्ति

रबी 2026 से सहकारी समितियों व निजी केंद्रों में अनिवार्य हुई व्यवस्था; मोबाइल से खाद बुक कर टोकन दिखाकर उठा सकेंगे यूरिया, डीएपी

🔴 जांजगीर-चांपा। जिले में किसानों को फसलों की मांग के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए टोकन व्यवस्था के तहत वितरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इसके लिए फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है। इस आधुनिक टोकन व्यवस्था के लागू होने से किसानों को निर्धारित मात्रा में रासायनिक खाद आसानी से मिलेगी, वहीं संपूर्ण वितरण प्रणाली पहले से अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और सुगम बनेगी। रबी सीजन 2026 से जिले की सभी प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों से किसानों को टोकन के माध्यम से ही रासायनिक खाद बेची जाएगी।

वितरण केंद्रों में कतार और अनावश्यक भीड़ से राहत

कृषि विभाग के अनुसार टोकन व्यवस्था शुरू होने से सोसायटियों और निजी खाद दुकानों में लगने वाली लंबी कतारों और अनावश्यक भीड़ पर नियंत्रण पाने में सीधी मदद मिल रही है। व्यवस्था के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विभागीय मैदानी अमले ने विकासखंडों में सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में मेसर्स आर.के. ट्रेडर्स अकलतरा, मेसर्स किसान खाद भंडार पामगढ़ और सेवा सहकारी समिति बम्हनीडीह में पंजीकृत किसानों को ऑनलाइन टोकन के जरिए यूरिया, डीएपी और सुपर फास्फेट उर्वरक उपलब्ध कराया गया।

समिति प्रबंधकों और निजी विक्रेताओं को तकनीकी प्रशिक्षण

कृषि विभाग के जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों द्वारा लगातार सेवा सहकारी समिति प्रबंधकों, निजी कृषि केंद्रों के प्रोप्राइटरों और किसानों को इस नई टोकन वितरण व्यवस्था का जमीनी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान सॉफ्टवेयर संचालन और टोकन सत्यापन की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है, ताकि किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में किसी तरह की तकनीकी बाधा न आए।

मोबाइल ऐप से टोकन बुक करने की अपील

उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे अपने स्मार्टफोन में Framework for Fertilizer Sale (FFS) सॉफ्टवेयर डाउनलोड करें। किसान घर बैठे इस ऐप से अपनी आवश्यकतानुसार उर्वरक बुक करें और जारी टोकन को संबंधित सेवा सहकारी समिति अथवा निजी कृषि केंद्र में दिखाकर खाद प्राप्त करें। उन्होंने किसानों से इस नई डिजिटल व्यवस्था के व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोग करने का भी आग्रह किया है।

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