Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में IISc बेंगलुरु के सहयोग से शुरू होंगी 3 बड़ी परियोजनाएं: बस्तर-सरगुजा के युवाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण, सीएम साय ने की उच्चस्तरीय बैठक

मटेरियल टेस्टिंग सेंटर, एकीकृत शिक्षक संस्थान और मेडिकल स्कूल के हब-नेटवर्क मॉडल पर मंथन; एआई व सेमीकंडक्टर में खुलेंगे नए अवसर

🔴 रायपुर। छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में देश के शीर्ष अनुसंधान संस्थान भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में प्रदेश को वैज्ञानिक अनुसंधान, उच्च शिक्षा और चिकित्सा प्रौद्योगिकी का हब बनाने के लिए तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन परियोजनाओं की व्यवहार्यता का परीक्षण कर शीघ्र ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

बस्तर-सरगुजा के युवाओं को अनुसंधान और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि आईआईएससी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की विशेषज्ञता का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के ग्रामीण व जनजातीय अंचलों के प्रतिभाशाली युवाओं को आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। इसके तहत विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जैव प्रौद्योगिकी और बुनियादी विज्ञान के क्षेत्र में समर-विंटर रिसर्च इंटर्नशिप व हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के विशेष अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से तैयार होगा नया आधार

बैठक में आईआईएससी बेंगलुरु और छत्तीसगढ़ शासन के बीच जिन तीन मुख्य परियोजनाओं पर सहमति बनी, वे निम्नलिखित हैं:

  • विश्वस्तरीय मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग सेंटर: खनिज, इस्पात और धातु बहुल छत्तीसगढ़ में नई औद्योगिक तकनीकों और उत्पाद गुणवत्ता सुधार के लिए अत्याधुनिक टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। इसमें उन्नत माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे विश्लेषण और एआई आधारित मूल्यांकन की सुविधाएं होंगी। केंद्र में 600 शोधार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता होगी और तीन वर्षों में 1,800 युवाओं को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • विज्ञान-गणित के लिए 4 वर्षीय एकीकृत BSc-B.Ed संस्थान: राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विज्ञान और गणित के उत्कृष्ट शिक्षक तैयार करने के लिए विशेष आवासीय संस्थान बनेगा। इसमें 14 आधुनिक प्रयोगशालाएं, 25 पूर्णकालिक शिक्षक और 600 विद्यार्थियों की क्षमता होगी, जिसका अकादमिक मार्गदर्शन आईआईएससी करेगा।
  • चिकित्सा अनुसंधान व डिजिटल हेल्थ (हब-नेटवर्क मॉडल): बेंगलुरु स्थित टाटा आईआईएससी मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों को दिलाने के लिए हब-नेटवर्क मॉडल पर काम होगा। इसके जरिए कैंसर, न्यूरोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी और किफायती स्वास्थ्य तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा।

जल संरक्षण और स्थानीय तकनीकी नवाचार पर भी मंथन

बैठक में दूरस्थ वनांचलों के लिए उपयोगी वैज्ञानिक नवाचारों पर भी चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने बस्तर और सुकमा में बिना बिजली के जल प्रवाह की ऊर्जा से संचालित होने वाले हाइड्रोलिक रैम एवं टरबाइन पंपों की कार्यप्रणाली साझा की। साथ ही कर्नाटक के कोलार मॉडल की तर्ज पर शोधित जल के पुनर्चक्रण और भूजल संवर्धन तकनीकों के छत्तीसगढ़ में उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

बैठक में आईआईएससी बेंगलुरु के निदेशक प्रो. जी. रंगराजन, डीन प्रो. पी.एस. अनिल कुमार, प्रो. सत्यम सुवास, प्रो. सतीश राघवन सहित नई दिल्ली में पदस्थ निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उच्च शिक्षा सचिव अविनाश चंपावत, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और कौशल विकास सचिव डॉ. बसवराजू उपस्थित रहे।

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