जाँजगीर -चाँपा

मड़वा पावर प्लांट पर रोजगार नहीं देने का आरोप, प्रभावित परिवार ने जनदर्शन में मांगी आत्मदाह की अनुमति

अधिग्रहित भूमि के बदले नौकरी नहीं मिलने का दावा, कलेक्टर को आवेदन सौंपकर जांच और रोजगार की मांग।

🔴 Aaj Ki Baat News | जांजगीर-चांपा

जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम सरखो निवासी रामसनेही राठौर ने मड़वा पावर प्लांट प्रबंधन पर अधिग्रहित भूमि के बदले रोजगार नहीं देने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने जनदर्शन में कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए न्याय की मांग की है। आवेदन में उन्होंने वर्षों से रोजगार नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए समस्या के समाधान की मांग की है। रामसनेही राठौर के अनुसार उनके पिता रामलाल राठौर के नाम दर्ज भूमि खसरा नंबर 1067 एवं 1072/3, रकबा 0.43 एकड़ का मुआवजा वर्ष 2011 में दिया गया था। इसके अलावा खसरा नंबर 1139/1, रकबा 0.10 एकड़ का मुआवजा वर्ष 2015 में प्राप्त हुआ। वहीं उनकी पत्नी सरिता राठौर के नाम दर्ज भूमि के हिस्से का मुआवजा वर्ष 2020 में प्रदान किया गया। परिवार का कहना है कि परियोजना के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया, लेकिन बदले में परिवार के किसी सदस्य को रोजगार नहीं दिया गया।

रोजगार के लिए कई बार किया आवेदन

रामसनेही राठौर का आरोप है कि उन्होंने समय-समय पर मड़वा पावर प्लांट प्रबंधन से रोजगार की मांग की। उन्होंने बताया कि आईटीआई सहित आवश्यक शैक्षणिक और तकनीकी दस्तावेज भी जमा किए गए, लेकिन उन्हें रोजगार का अवसर नहीं मिला। पीड़ित का दावा है कि गांव के अन्य प्रभावित परिवारों के सदस्यों को प्लांट में रोजगार दिया गया, जबकि उनके परिवार को इस सुविधा से वंचित रखा गया।

जनदर्शन में पहुंची शिकायत

मामले को लेकर रामसनेही राठौर ने जनदर्शन में कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर जांच की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि अधिग्रहित भूमि के बदले रोजगार से संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।

प्रबंधन का पक्ष आना बाकी

फिलहाल इस मामले में मड़वा पावर प्लांट प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

जनदर्शन में मामला पहुंचने के बाद अब प्रभावित परिवार की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।

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