रात 10 बजे गांव पहुंचे SP, अमोरा को बताया नशामुक्त मॉडल; अब हेलमेटयुक्त गांव बनाने का संकल्प

महिला कमांडो टीम की पहल बनी मिसाल, 150 महिलाओं को सम्मान; ‘एक हेलमेट पति के नाम’ अभियान से सड़क सुरक्षा को मिला नया संदेश
🔴 Aaj Ki Baat News | जांजगीर-चांपा
मुख्यमंत्री ड्यूटी पूरी करने के बाद रविवार रात करीब 10 बजे पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय सीधे थाना मुलमुला क्षेत्र के ग्राम अमोरा पहुंचे। देर रात हुए इस कार्यक्रम में पुलिस और ग्रामीणों के बीच संवाद, महिला सशक्तीकरण, नशामुक्ति और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। एसपी ने अमोरा को नशामुक्त गांव की पहचान बताते हुए इसे पूर्ण हेलमेटयुक्त गांव बनाने का आह्वान किया।
जब महिलाएं बनीं गांव की कमांडो
कार्यक्रम का सबसे चर्चित पहलू महिला कमांडो टीम रही। गांव की महिलाएं न केवल नशे और अवैध शराब के खिलाफ मोर्चा संभाल रही हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए आवारा मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी भी बांध रही हैं। अधिकारियों ने इस पहल को पूरे जिले के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया।
‘एक हेलमेट पति के नाम’ ने खींचा ध्यान
सड़क सुरक्षा को लेकर एसपी ने महिला कमांडो सदस्यों को हेलमेट वितरित किए। ‘एक हेलमेट पति के नाम’ अभियान के जरिए महिलाओं से परिवार के पुरुष सदस्यों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने की अपील की गई। ग्रामीणों ने दावा किया कि गांव में अधिकांश दोपहिया चालक अब नियमित रूप से हेलमेट का उपयोग कर रहे हैं।
150 महिला कमांडो और सरपंच का सम्मान
नशामुक्ति, महिला सशक्तीकरण और अवैध शराब रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाने पर करीब 150 महिला कमांडो सदस्यों और ग्राम सरपंच को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। मंच से उनके प्रयासों की खुले दिल से सराहना की गई।

थाना प्रभारी पारस पटेल को भी मिला सम्मान
अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई, जनजागरूकता अभियान और महिला कमांडो टीम के साथ समन्वयपूर्ण कार्य के लिए थाना प्रभारी मुलमुला निरीक्षक पारस पटेल को ग्राम पंचायत और महिला कमांडो टीम ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
SP ने बच्चों संग केक काटकर दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान एसपी ने बच्चों के साथ केक काटा और उन्हें पढ़ाई, अनुशासन तथा खेलकूद के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने बच्चों से मोबाइल की लत से दूर रहकर अपने भविष्य पर ध्यान देने की अपील की।
जनभागीदारी से बदल रही गांव की तस्वीर
अधिकारियों ने कहा कि जब गांव खुद नशे, अवैध शराब और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जिम्मेदारी लेने लगता है, तब बदलाव दिखाई देने लगता है। अमोरा इसका एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभर रहा है।




