जाँजगीर -चाँपा

जांजगीर चाम्पा: ‘हाइड्रोफ्रेक्चर’ तकनीक से बनाहिल में बुझी प्यास, कलेक्टर की पहल पर पुनर्जीवित हुए सूखे हैंडपंप


जांजगीर-चांपा | 17 मार्च 2026: गर्मी की दस्तक के साथ ही गहराते जल संकट के बीच जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा विकासखंड स्थित ग्राम बनाहिल से राहत भरी खबर आई है। कलेक्टर  जन्मेजय महोबे की त्वरित संवेदनशीलता और आधुनिक ‘हाइड्रोफ्रेक्चर’ तकनीक के मेल ने गांव के सूखे पड़ रहे हैंडपंपों में फिर से पानी लौटा दिया है।


कलेक्टर के निर्देश पर PHE की त्वरित कार्रवाई
हाल ही में बनाहिल के ग्रामीणों ने कलेक्टर से मिलकर पेयजल किल्लत की शिकायत की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। इसके बाद PHE के कार्यपालन अभियंता आदित्य प्रताप और सहायक अभियंता  पवन अग्रवाल ने गांव का दौरा किया।


क्या है हाइड्रोफ्रेक्चर तकनीक?
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जल स्तर नीचे जाने के कारण हैंडपंप दम तोड़ रहे हैं। विभाग ने यूनिसेफ (UNICEF) की मशीन की मदद से ‘हाइड्रोफ्रेक्चर’ तकनीक अपनाने का निर्णय लिया इस तकनीक में उच्च दबाव (High Pressure) के माध्यम से जमीन के भीतर चट्टानों की दरारों को साफ किया जाता है और नई जल शिराओं को खोला जाता है। 15 मार्च को कांतिपारा और पामगढ़ मार्ग स्थित यात्री प्रतीक्षालय के पास के हैंडपंपों में यह कार्य किया गया, जिससे उनकी जल आवक क्षमता में भारी वृद्धि हुई।


1600 से अधिक आबादी को मिली बड़ी राहत
लगभग 1629 की आबादी वाले इस गांव में कुल 17 हैंडपंप स्थापित हैं। फिलहाल महत्वपूर्ण स्थानों के हैंडपंप चालू हो गए हैं और शेष हैंडपंपों को भी इसी तकनीक से पुनर्जीवित करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इस पहल से ग्रामीणों में खुशी की लहर है, क्योंकि अब उन्हें भीषण गर्मी में पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

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