जांजगीर-नैला: भीमा तालाब के जल शुद्धिकरण में जुटा अमला, जनप्रतिनिधियों व सीएमओ के निरीक्षण के बाद सफाई तेज

दुर्गंध की शिकायत पर नगर पालिका प्रशासन का एक्शन; पानी में चूना, ब्लीचिंग पाउडर और पोटाश का कराया गया छिड़काव
🔴 आज की बात News | जांजगीर-नैला। शहर के ऐतिहासिक भीमा तालाब में पिछले कुछ दिनों से पानी की गुणवत्ता बिगड़ने और भीषण दुर्गंध की समस्या को लेकर नगर पालिका प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय नागरिकों और आसपास के रहवासियों को हो रही परेशानी की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए नगर पालिका जांजगीर-नैला की टीम ने जल शुद्धिकरण और स्वच्छता अभियान युद्धस्तर पर छेड़ दिया है।
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सीएमओ ने किया था मौका मुआयना
समस्या की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संबंधित वार्ड के पार्षद, सभापति, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) तथा दोनों उप अभियंताओं ने सफाई अमले के साथ भीमा तालाब का विस्तृत स्थल निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने तालाब के विभिन्न कोनों का मुआयना कर गंदगी के जमाव, जलस्तर की स्थिति और बदबू के मुख्य कारणों की समीक्षा की थी। मौके पर ही सीएमओ और इंजीनियरों को जल शुद्धिकरण और दुर्गंध नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
चूना, ब्लीचिंग पाउडर और पोटाश का कराया गया छिड़काव
निरीक्षण में दिए गए निर्देशों के परिपालन में नगर पालिका के सफाई अमले ने सुबह से ही भीमा तालाब में जल उपचार का कार्य प्रारंभ किया। कर्मचारियों द्वारा तालाब के चारों ओर और प्रभावित हिस्सों में आवश्यकतानुसार चूना, ब्लीचिंग पाउडर एवं पोटाश का व्यवस्थित छिड़काव किया गया, ताकि पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो सकें और उठ रही तीखी दुर्गंध पर फौरी तौर पर काबू पाया जा सके। इस कार्य में सफाई कर्मी भोला, लखन बघेल सहित अन्य कर्मचारियों ने सुबह से डटकर सक्रिय भूमिका निभाई।
सतत निगरानी के निर्देश, नागरिकों से भी सहयोग की अपील
नगर पालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई महज औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगी। तालाब के पानी की स्थिति पर नियमित निगरानी रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी केमिकल ट्रीटमेंट व सफाई का काम जारी रहेगा। पालिका प्रशासन ने शहरवासियों से भी अपील की है कि वे तालाब की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग दें और उसमें कचरा, प्लास्टिक या पूजा सामग्री विसर्जित न करें, ताकि जल स्रोत स्वच्छ और पर्यावरण सुरक्षित बना रहे।




