
बैंक स्टेटमेंट से हुआ बड़ा खुलासा, पूर्व उपसरपंच, पूर्व सरपंच व तत्कालीन सचिव पर सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप; धारा 92 के तहत कार्रवाई की मांग
🔴 आज की बात News | जैजैपुर। जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटेतरा में 15वें वित्त व मूलभूत मद की शासकीय राशि के भारी बंदरबांट और गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया है कि कार्यकाल के दौरान पूर्व उपसरपंच देवानन्द यादव ने तत्कालीन सरपंच और पंचायत सचिव के साथ मिलीभगत कर पंचायती राज नियमों को ताक पर रखते हुए अपने निजी बैंक खाते में सीधे ₹26,80,500/- (छब्बीस लाख अस्सी हजार पांच सौ रुपये) का अवैध भुगतान करवा लिया। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और राशि की तत्काल वसूली की मांग की है।
बैंक स्टेटमेंट खंगालने पर फूटा भ्रष्टाचार का भांडा
मामले का खुलासा तब हुआ जब सजग ग्रामीणों ने पंचायत के वित्तीय रिकॉर्ड, पासबुक और बैंक स्टेटमेंट की बारीकी से पड़ताल की। पंचायती राज अधिनियम के स्पष्ट प्रावधानों के तहत कोई भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने पद पर रहते हुए स्वयं को या अपने निजी फर्म को सीधे पंचायत निधि से भुगतान नहीं कर सकता।
इसके बावजूद कोटेतरा पंचायत में नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए इतनी बड़ी शासकीय राशि सीधे पूर्व उपसरपंच के खाते में अंतरित (ट्रांसफर) कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधे तौर पर पद का दुरुपयोग, आपराधिक षड्यंत्र और जनता के टैक्स के पैसों की खुली डकैती है।

धारा 92 के तहत वसूली और जेल भेजने की मांग
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को दिए ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध है। शिकायत पत्र में मांग की गई है कि:
- छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 के तहत तत्काल प्रकरण दर्ज कर 26.80 लाख रुपये की वसूली की जाए।
- सरकारी राशि के गबन के आरोपी पूर्व उपसरपंच देवानन्द यादव, तत्कालीन सरपंच और तत्कालीन पंचायत सचिव के विरुद्ध संबंधित थाने में धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाए।
कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि गांव के विकास के लिए आई शासकीय राशि को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने अपनी जेब भरने में खर्च कर दिया। यदि जिला प्रशासन मामले में तत्परता दिखाते हुए दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और रिकवरी के आदेश जारी नहीं करता है, तो ग्रामीण ब्लॉक व जिला मुख्यालय पर उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को विवश होंगे।



