Chhattisgarh

जिले में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू: 30 नवंबर तक किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति किया जाएगा जागरूक

उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने दी जानकारी; मृदा स्वास्थ्य सुधारने जैविक, नैनो उर्वरक और हरी खाद को बढ़ावा देने पर जोर

🔴 जांजगीर-चांपा। कृषि भूमि की घटती उर्वरता, मिट्टी के कटाव, मृदा कार्बन एवं पोषक तत्वों की कमी तथा जल प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए जिले के समस्त विकासखंडों में 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक विशेष ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खादों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग के नुकसानों से अवगत कराते हुए प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है।

चौपालों और संगोष्ठियों के जरिए किसानों को किया जा रहा जागरूक

अभियान के तहत ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला स्तर पर कृषक संगोष्ठियों, कृषि चौपालों, जनजागरूकता कार्यक्रमों तथा प्रशिक्षण शिविरों का निरंतर आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में कृषि विभाग के मैदानी अमले और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित: राकेश शर्मा

उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल से मिट्टी की भौतिक व जैविक गुणवत्ता तेजी से घट रही है, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन की स्थिरता पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। इसके विकल्प के रूप में किसानों को हरी खाद, नील-हरित काई, जैव उर्वरक, नैनो यूरिया/डीएपी, जैविक खाद तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों के इस्तेमाल के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने की पहल, उत्कृष्ट किसान होंगे सम्मानित

प्राकृतिक खेती को पंचायत स्तर पर जनआंदोलन का रूप देने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्व-सहायता समूहों, किसान समूहों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। किसान फील्ड स्कूलों में अनुभवी प्राकृतिक कृषकों को जोड़कर ‘किसान से किसान सीखे’ व्यवस्था को लागू किया गया है। अभियान के दौरान प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा। साथ ही कृषि एवं संबद्ध विभागों की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर पात्र कृषकों को लाभान्वित किया जा रहा है।

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