जाँजगीर -चाँपाधर्म भक्ति

हरदी के महामाया मंदिर में साक्षात आती हैं देवी! सप्तमी की रात थम जाती हैं सांसें, आटे पर दिखते हैं ‘शेर’ के पदचिह्न; कैमरों पर बांध दिया जाता है कपड़ा


जांजगीर-चांपा: जांजगीर जिले के ग्राम हरदी (महामाया) की पहाड़ियों पर विराजमान माँ महामाया देवी मंदिर अपनी प्राचीनता और चमत्कारों के लिए विश्व विख्यात है। यहाँ चैत्र और शारदीय नवरात्र की सप्तमी की रात एक ऐसी रहस्यमयी घटना घटती है, जिसे देखने और महसूस करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं।

रात 12 बजे बंद हो जाते हैं कपाट, कैमरों पर बांधा जाता है कपड़ा
सप्तमी की कालरात्रि में यहाँ एक विशेष परंपरा निभाई जाती है। रात ठीक 12 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूरे परिसर में अंधेरा कर दिया जाता है। गोपनीयता बनाए रखने के लिए मंदिर के सभी सीसीटीवी कैमरों पर कपड़ा बांध दिया जाता है। गर्भगृह में माँ की पिण्डी के सामने जमीन पर चलनी से आटा बिखेर दिया जाता है। ऐसी अटूट मान्यता है कि इस एक घंटे (रात 12 से 1 बजे) के दौरान माँ महामाया स्वयं सिंह (शेर) पर सवार होकर यहाँ साक्षात आती हैं। जब एक घंटे बाद कपाट खोले जाते हैं, तो गर्भगृह में बिछाए गए आटे पर शेर के पदचिह्न साफ नजर आते हैं।

रतनपुर के बाद दूसरा बड़ा शक्तिपीठ
श्री महामाया देवी पब्लिक ट्रस्ट हरदी के अध्यक्ष के अनुसार, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर साल भक्त इन पदचिह्नों के दर्शन करते हैं। रतनपुर स्थित महामाया देवी के बाद हरदी की महामाया को प्रदेश का दूसरा प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। जिले के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में इस मंदिर का विशेष महत्व है।

सात समंदर पार तक है माँ की महिमा
माँ महामाया के प्रति आस्था केवल जिले या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी फैली है। मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक, यहाँ अमेरिका, अफ्रीका और हांगकांग जैसे देशों में बसे भारतीय नागरिक भी हर साल मनोकामना ज्योत प्रज्ज्वलित करवाते हैं। इस शारदीय नवरात्र में ही करीब 2000 से 3000 के बीच ज्योत कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं।

हजारों श्रद्धालुओं का उमड़ता है सैलाब
नवरात्र के दौरान हरदी की पहाड़ियों पर भक्तों का तांता लगा रहता है। सप्तमी की रात होने वाले इस दिव्य चमत्कार की चर्चा अब सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर में हो रही है, जिससे यहाँ पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हर साल भारी इजाफा हो रहा है।

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