
एक्टर विजय की पार्टी TVK को कांग्रेस के समर्थन से भड़की DMK; कनिमोझी बोलीं- “अब कांग्रेस के साथ बैठना उचित नहीं।”
नई दिल्ली/चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल राज्य की सत्ता बदली है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडी’ (INDIA) गठबंधन की बुनियाद भी हिला दी है। दक्षिण भारत में कांग्रेस की सबसे पुरानी और भरोसेमंद सहयोगी रही DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) ने कांग्रेस से अपना दो दशक पुराना नाता तोड़ लिया है। इस अलगाव की आधिकारिक पुष्टि तब हुई जब DMK की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक पत्र लिखकर सदन में DMK सांसदों की बैठने की व्यवस्था बदलने का अनुरोध किया।
बैठने की व्यवस्था बदलने के लिए लिखा पत्र
लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कनिमोझी ने स्पष्ट रूप से ‘बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों’ का हवाला दिया है। उन्होंने लिखा, “चूंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के साथ हमारा गठबंधन अब समाप्त हो चुका है, इसलिए हमारे सांसदों के लिए सदन में कांग्रेस सदस्यों के साथ बैठना अब उचित नहीं होगा। मैं अनुरोध करती हूँ कि DMK संसदीय दल के सदस्यों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की जाए।”
क्यों टूटी 20 साल पुरानी दोस्ती?
इस दरार की मुख्य वजह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम हैं। चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि DMK को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े तक पहुँचने के लिए कांग्रेस (5 सीटें) ने DMK का साथ छोड़कर विजय की TVK को समर्थन देने का फैसला किया है। DMK ने कांग्रेस के इस कदम को ‘पीठ में छुरा घोंपना’ करार दिया है।
इंडी गठबंधन के लिए बड़ा झटका
DMK और कांग्रेस का गठबंधन साल 2004 से चला आ रहा था। हालिया लोकसभा चुनाव में भी इस जोड़ी ने राज्य में क्लीन स्वीप किया था। अब गठबंधन टूटने से विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत में कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी क्षति है, क्योंकि DMK न केवल एक मजबूत चुनावी साथी थी, बल्कि वैचारिक रूप से भी कांग्रेस के करीब थी।




