17 मई से शुरू होगा अधिक मास, जानिए विष्णु पूजा और मंत्र जाप का विशेष महत्व

15 जून तक रहेगा पुरुषोत्तम मास, धन लाभ, सुख-समृद्धि और बाधा निवारण के लिए शुभ माना जाता है यह पवित्र समय
धर्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा। इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास पड़ने के कारण ज्येष्ठ महीना दो बार आएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है।
क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। शास्त्रों में इसे अत्यंत पुण्यदायी और चमत्कारी महीना माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप, दान-पुण्य और सात्विक जीवन अपनाने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।
धन लाभ और अटके कामों के लिए मंत्र
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
मान्यता है कि अधिक मास में इस मंत्र का नियमित जाप करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने लगती है।
विवाह और वैवाहिक सुख के लिए मंत्र
ॐ अ: अनुरुद्धाय नमः।
विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों को दूर करने के लिए इस मंत्र का जाप लाभकारी माना गया है।
लक्ष्मी-नारायण कृपा पाने का मंत्र
ॐ अं वासुदेवाय नमः।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का जाप करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
लक्ष्मी विनायक मंत्र
दन्ताभये चक्र दरो दधानं,
कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया,
लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
इस मंत्र का जाप धन, समृद्धि और बाधा निवारण के लिए शुभ माना जाता है।
विष्णु के पंचरूप मंत्र
- ॐ अं वासुदेवाय नमः
- ॐ आं संकर्षणाय नमः
- ॐ अं प्रद्युम्नाय नमः
- ॐ अ: अनिरुद्धाय नमः
- ॐ नारायणाय नमः
इन मंत्रों का जाप अधिक मास में विशेष फलदायी माना गया है।
अधिक मास में रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। सात्विक भोजन, दान-पुण्य और सकारात्मक विचारों को अपनाना शुभ माना जाता है। मंत्र जाप सुबह या शाम के समय करना लाभकारी बताया गया है।
Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय आधार पर प्रस्तुत की गई है। इसकी पुष्टि का दावा नहीं किया जाता।




