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हरतालिका तीज 2026: अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत; जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन समय और जरूरी नियम

तृतीया तिथि पर सुबह करीब 1 घंटा रहेगा विशेष पूजा मुहूर्त; प्रदोष काल में पूजन का भी विशेष विधान

🔴 धर्म  डेस्क। सुहागिन महिलाओं के सबसे कठिन और पावन व्रतों में से एक ‘हरतालिका तीज’ इस वर्ष 14 सितंबर 2026 को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्घायु की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। तभी से कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने और सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिए यह निर्जला अनुष्ठान करती आ रही हैं।

तृतीया तिथि और पूजन के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे से प्रारंभ होगी और 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि की शास्त्रीय मान्यता के अनुसार व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा।

  • प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त: सुबह 6:05 बजे से सुबह 7:06 बजे तक (अवधि लगभग 1 घंटा 1 मिनट)
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:32 बजे से सुबह 5:19 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक
  • प्रदोष काल (संध्या पूजा): शाम को सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में भी भगवान शिव-पार्वती की विधिवत पूजा और आरती का विशेष फल मिलता है।

निर्जला व्रत और दिन में शयन से परहेज

हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है। संकल्प लेने के बाद व्रती पूरे दिन और रात अन्न व जल दोनों का त्याग करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत में दिन के समय सोने की मनाही होती है। व्रतियों को पूरा दिन और रात्रि भगवान शिव-पार्वती के भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और जागरण में बिताना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अस्वस्थ व्रतियों को स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या चिकित्सकीय सलाह के आधार पर व्रत करने की छूट रहती है।

वस्त्रों के शुभ रंग और आचरण की शुद्धता

पूजा के दौरान सुहागिनों के लिए लाल, पीले और हरे रंग के वस्त्र अत्यंत शुभ माने गए हैं। इस दिन काले, गहरे नीले और सफेद रंग के वस्त्रों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, व्रत के दौरान क्रोध, कटु वचन, वाद-विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर मन, वाणी और कर्म की पवित्रता बनाए रखने का विधान है।

व्रत कथा का श्रवण अनिवार्य

हरतालिका तीज की विधिवत पूजा में बालू या मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की प्रतिमा बनाकर पूजन किया जाता है। पूजा के पश्चात हरतालिका तीज व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि इसके बिना व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

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