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बाल विवाह पर प्रशासन का बड़ा एक्शन: बारात निकलने से पहले बलौदा के नवापारा (ख) में रोका गया 18 वर्षीय दूल्हे का विवाह

दस्तावेजों की पड़ताल में 21 वर्ष से कम निकली उम्र; महिला बाल विकास विभाग और राजस्व अमले ने परिजनों को समझाकर रुकवाई शादी

🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर प्रशासन की सजगता से एक और कम उम्र के लड़के का विवाह समय रहते रुकवा दिया गया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिता अग्रवाल के मार्गदर्शन में संयुक्त जांच टीम ने विकासखंड बलौदा के ग्राम नवापारा (ख) में दबिश देकर त्वरित कार्रवाई की।

दस्तावेजों में 18 वर्ष का निकला लड़का

जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेन्द्र सिंह जायसवाल के नेतृत्व में जांच दल नवापारा (ख) में लड़के के घर पहुंचा। जन्म संबंधी शैक्षणिक व आधिकारिक दस्तावेजों के सत्यापन में पाया गया कि लड़के की वास्तविक उम्र 18 वर्ष 2 माह 28 दिन है। कानूनन विवाह के लिए युवक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है, लिहाजा यह विवाह स्पष्ट रूप से बाल विवाह की श्रेणी में आ रहा था।

परिजनों को दी समझाइश, लिखित सहमति से रुका विवाह

अधिकारियों ने लड़के और उसके माता-पिता सहित स्थानीय ग्रामीणों को बाल विवाह के कानूनी व सामाजिक दुष्परिणामों से अवगत कराया। विस्तृत समझाइश के बाद परिजनों ने कानून का पालन करने पर सहमति जताई और विवाह कार्यक्रम स्थगित कर दिया। टीम ने स्पष्ट किया कि लड़कों की उम्र 21 वर्ष और लड़कियों की उम्र 18 वर्ष पूरी होने से पहले विवाह कराना दंडनीय अपराध है।

जांच व कार्रवाई टीम में बलौदा तहसीलदार अखिलेश विश्वकर्मा, चाइल्ड हेल्पलाइन समन्वयक विष्णु श्रीवास, काउंसलर अल्का फांक, सेक्टर पर्यवेक्षक सकुन सोन, राधेश्याम ओग्रे, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम कोटवार शामिल रहे।

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