833 किलो गांजा जब्ती केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी आरोपी बरी, DRI की जांच पर उठाए सवाल

ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द, जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां मिलने पर डीआरआई की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी।
🔴 Aaj Ki Baat News | बिलासपुर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 833.271 किलोग्राम गांजा जब्ती से जुड़े बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को दोषी ठहराए जाने का आदेश रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी करते हुए जांच प्रक्रिया में गंभीर कानूनी और प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है।
2021 में पकड़ा गया था गांजे से भरा ट्रक
मामला 3 अक्टूबर 2021 का है। डीआरआई को सूचना मिली थी कि आंध्र प्रदेश से उत्तर प्रदेश जा रहे एक ट्रक में भारी मात्रा में गांजा ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर गरियाबंद जिले के तुरेंगा वन जांच चौकी के पास ट्रक को रोका गया। आरोप है कि ट्रक में मुरमुरे की बोरियों के नीचे 833.271 किलोग्राम गांजा छिपाकर रखा गया था।
जांच प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने जताई आपत्ति
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रक को मौके पर ही जब्त कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बजाय करीब 150 किलोमीटर दूर रायपुर स्थित डीआरआई कार्यालय ले जाया गया। अदालत ने इसे गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटि माना। इस दौरान कथित एस्कॉर्ट वाहन में सवार संदिग्धों के फरार होने का भी उल्लेख किया गया।
15 साल की सजा हुई रद्द
विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने पहले सभी आरोपियों को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.50 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने अपीलों पर सुनवाई के बाद इस फैसले को रद्द करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
DRI को विभागीय जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले में डीआरआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए महानिदेशक (DG), नई दिल्ली को आदेश की प्रति भेजकर पूरे मामले की विभागीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस जैसे कठोर कानूनों में कानूनी प्रक्रिया का अक्षरशः पालन आवश्यक है।




