national

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई, कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की छूट

ईंधन बचत को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नई व्यवस्था लागू, जजों में कार-पूलिंग को भी बढ़ावा

नई दिल्ली, 15 मई 2026। ईंधन बचत और प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुपालन में अदालत प्रशासन ने सुनवाई व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में कई बदलाव लागू किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भारत पराशर द्वारा 15 मई को जारी सर्कुलर में बताया गया कि ये निर्णय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा 12 मई को जारी कार्यालय ज्ञापन के आधार पर लिए गए हैं। यह ज्ञापन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और संभावित ईंधन संकट को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया था।

अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार सोमवार और शुक्रवार जैसे विविध दिवसों पर सूचीबद्ध मामलों तथा आंशिक कार्य दिवसों में निर्धारित मामलों की सुनवाई अगले आदेश तक केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। सर्कुलर में रजिस्ट्रारों को निर्देश दिए गए हैं कि सुनवाई के लिए समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक उपलब्ध कराए जाएं और तकनीकी व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रखी जाए। साथ ही न्यायाधीशों को सुनवाई के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी न हो, इसके लिए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है।

जजों में कार-पूलिंग को बढ़ावा

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने भी ईंधन बचत की दिशा में पहल करते हुए आपसी सहमति से कार-पूलिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा अदालत की विभिन्न शाखाओं और अनुभागों में कार्यरत कर्मचारियों को सप्ताह में अधिकतम दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी गई है। हालांकि अदालत प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि न्यायालयीन कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए कार्यालय में पर्याप्त कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

रजिस्ट्रारों को दिए गए विशेष निर्देश

सर्कुलर में रजिस्ट्रारों को साप्ताहिक रोस्टर पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। घर से काम करने वाले कर्मचारियों को मोबाइल और अन्य माध्यमों से हर समय उपलब्ध रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्यालय पहुंचने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। अधिकारियों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि सभी कार्य निर्धारित समय पर पूरे हों। जिन शाखाओं में कार्य की प्रकृति के कारण वर्क फ्रॉम होम संभव नहीं है, वहां संबंधित अधिकारी इस सुविधा को सीमित कर सकते हैं।

ईंधन बचत को लेकर बढ़ी सतर्कता

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा संसाधनों को लेकर सतर्कता बढ़ी हुई है। अदालत प्रशासन का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था और सीमित संसाधनों के बेहतर उपयोग से ईंधन की बचत के साथ प्रशासनिक कार्यों को भी प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है।

Related Articles

Back to top button