सक्ती: वेदांता पावर प्लांट मामले में हाईकोर्ट पहुंचा भू-विस्थापितों का मामला, चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका

सिंघीतराई के भू-विस्थापित परिवारों ने आरोप लगाया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले भत्ते और अन्य लाभ नहीं दिए गए। मामले में हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है।
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सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो तथा डभरा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को पक्षकार बनाया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने का आरोप
भू-विस्थापित परिवारों का आरोप है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाला भत्ता और अन्य लाभ अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी कारण न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की गई है।
करीब 800 परिवार हुए थे प्रभावित
जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में सिंघीतराई स्थित पावर प्लांट की स्थापना के लिए आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। इससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। पुनर्वास नीति-2007 के तहत पात्र परिवारों को रोजगार अथवा नियमानुसार भत्ता देने का प्रावधान है।
400 से अधिक परिवारों को नहीं मिला लाभ
याचिका में कहा गया है कि प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ था, जो 2016 में बंद हो गया। बाद में वर्ष 2022 में वेदांता समूह ने इसका अधिग्रहण किया और 2025 में पुनः संचालन शुरू किया। इसके बावजूद 400 से अधिक प्रभावित परिवारों को न रोजगार मिला और न ही निर्धारित भत्ता।
प्रशासन ने दिए थे निर्देश
भू-विस्थापितों के अनुसार वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद अदालत ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासनिक समिति और सक्ती कलेक्टर ने भी प्लांट प्रबंधन को पात्र परिवारों को भत्ता देने के निर्देश जारी किए, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ।
प्रशासन ने समाधान के प्रयास की बात कही
सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद प्लांट प्रबंधन को नियमानुसार भत्ता देने के लिए पत्र जारी किया गया है और मामले के समाधान के प्रयास जारी हैं। फिलहाल मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होना शेष है और संबंधित पक्ष अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे।




