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ईरान सीजफायर पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- ‘लाइफ सपोर्ट पर टिका है संघर्ष विराम’

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप ने तेहरान के प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य, वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ी चिंता

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी संघर्ष विराम को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच लागू सीजफायर बेहद कमजोर स्थिति में है और फिलहाल “लाइफ सपोर्ट” पर टिका हुआ है।

व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान की ओर से आए हालिया प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी दबाव में नहीं है और देश पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है।

ईरान के जवाब को ट्रंप ने किया खारिज

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने तेहरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव का अध्ययन किया, लेकिन उसमें ऐसी कोई बात नहीं है जिसे स्वीकार किया जा सके। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कुछ महीनों से तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी के अंत से शुरू हुए संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।

सीजफायर के बावजूद नहीं थमा तनाव

अप्रैल महीने में दोनों पक्षों के बीच अस्थायी संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार तेहरान ने युद्ध रोकने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों में भी संघर्ष विराम लागू करने की मांग शामिल है।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात भी कही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर टकराव जारी

अमेरिका लगातार ईरान से यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह बंद करने की मांग कर रहा है। इसके बदले में प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है।

वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई संकट की आशंका भी बढ़ गई है।

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