छत्तीसगढ़जाँजगीर -चाँपा

भारतीय संतों की वाणी ही मानवता के उज्जवल दीप : राजेश्री महन्त

पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में ‘भारतीय समाज एवं संस्कृति के संरक्षण में संतों का योगदान’ विषय पर व्याख्यान आयोजित


जांजगीर चाम्पा। पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर के सिहावा अकादमिक भवन में बुधवार को एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने छात्र-छात्राओं और प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए भारतीय संत परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुए राजेश्री महन्त जी ने कहा कि सत्य, अहिंसा और परमार्थ के जो मंगल स्वर भारतीय संतों की वाणी से निकले हैं, वे ही मानवता के उज्जवल दीप हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि संतों द्वारा जन-जन में जगाए गए भक्ति-भाव ही हमारे सामाजिक, राष्ट्रीय और आध्यात्मिक उत्थान के असली आधार हैं। महन्त जी ने कहा, “संतों की भक्ति, तन्मयता, त्याग और तप मानव चरित्र विकास का वह सूर्य है जो जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर देता है। धर्म, संस्कृति और शांति के असली अग्रदूत हमारे संत ही रहे हैं।” संत परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शंकराचार्य से लेकर जगद्गुरु श्री स्वामी रामानंदाचार्य जी महाराज तक, अनंत संतों ने इस धरती पर अपने आदर्शों के जो अमिट अक्षर लिखे हैं, वे कभी नहीं मिटेंगे। यही वह शक्ति है जो मानवता को कभी मिटने नहीं देगी। उनके आदर्श आज भी पूरी दुनिया को भारत की पावन धरा से शांति का संदेश दे रहे हैं।


कुलपति ने व्यक्त किया आभार
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वी. के. सारस्वत ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक के रूप में गुरुजी का मार्गदर्शन हम सबके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने छात्रों की एकाग्रता की प्रशंसा करते हुए कहा कि आमतौर पर छात्र कार्यक्रम समाप्त होने की प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन आज की शांति और अनुशासन ही इस आयोजन की असली सार्थकता है।


इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
व्याख्यान के प्रारंभ में विश्वविद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि का आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव चंद्र भूषण मिश्र, कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर हीरालाल शर्मा, पूर्णेन्द्र तिवारी, कमलेश सिंह, हर प्रसाद साहू सहित अनेक गणमान्य नागरिक, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

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