महासंयोग: वट सावित्री व्रत और शनि जयंती आज, एक ही दिन बन रहे 5 दुर्लभ धार्मिक संयोग

शनिश्चरी अमावस्या और दर्श अमावस्या का भी अद्भुत मेल; ग्रहों की युति से चमकेगा कई राशियों का भाग्य, जानें शुभ मुहूर्त।
धर्म डेस्क । साल 2026 की ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या (16 मई) धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद ऐतिहासिक होने जा रही है। आज के दिन वट सावित्री व्रत, शनि जयंती, शनिश्चरी अमावस्या, दर्श अमावस्या और मिथुन राशि में शुक्र-गुरु की युति का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इतने प्रभावशाली और दुर्लभ योग एक ही दिन में बहुत कम देखने को मिलते हैं। यह दिन शनिदेव की आराधना, पितृ तर्पण और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए सर्वोत्तम माना जा रहा है।
सुहागिनें वट वृक्ष पर बांधेंगी रक्षा सूत्र
पति की लंबी आयु और खुशहाली के लिए रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत आज सुहागिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से कर रही हैं। बरगद के पेड़ की परिक्रमा कर महिलाएं कच्चा सूत लपेटेंगी और माता सावित्री व सत्यवान की कथा सुनेंगी। इस वर्ष पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 8 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इसी दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस छीने थे।
शनि दोषों से मुक्ति का सबसे बड़ा दिन
शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने से यह ‘शनिश्चरी अमावस्या’ बन गई है, और इसी दिन सूर्यपुत्र शनिदेव का जन्मोत्सव (शनि जयंती) भी है। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा से पीड़ित लोगों के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। आज के दिन शनिदेव को सरसों का तेल, काला तिल, उड़द और काले वस्त्र अर्पित करने तथा पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान करने से शनि दोष शांत होते हैं। साथ ही शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से भी कष्टों से राहत मिलती है।
पितृ तर्पण और दान-पुण्य से चमकेगी किस्मत
ज्येष्ठ अमावस्या को दर्श अमावस्या भी कहा जाता है, जो पितरों की शांति के लिए समर्पित है। आज के दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करने और गाय, कौवे व जरूरतमंदों को भोजन कराने से पितृदोष दूर होता है। पंडितों के अनुसार, आज के दिन किए गए दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का फल कई गुना अधिक मिलता है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।




