छत्तीसगढ़जाँजगीर -चाँपाधर्म भक्ति

2 मई से शुरू होगा पवित्र ज्येष्ठ माह: 8 बड़ा मंगल, गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी से भरा रहेगा पूरा महीना

29 जून तक चलेंगे धार्मिक पर्व हनुमान भक्ति, दान-पुण्य और व्रत-उपासना का रहेगा विशेष महत्व

नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह, जिसे आमतौर पर ‘जेठ का महीना’ कहा जाता है, इस वर्ष 2 मई से प्रारंभ होकर 29 जून तक चलेगा। यह महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। गर्मी के इस मौसम में श्रद्धालु तप, संयम, दान और भक्ति के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करते हैं।

बड़ा मंगल: हनुमान भक्ति का विशेष पर्व
ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ मनाया जाता है। इस दिन भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और जगह-जगह भंडारे व प्रसाद वितरण होता है। मान्यता है कि इसी माह के एक मंगलवार को भगवान राम और हनुमान की पहली भेंट हुई थी। अधिकमास के कारण इस बार 8 बड़ा मंगल पड़ रहे हैं पहला 5 मई को और अंतिम 23 जून को होगा।

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वट सावित्री व्रत और शनि अमावस्या
ज्येष्ठ अमावस्या, जो इस बार 16 मई को है, सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है। इस दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है, जिसमें महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। इसी दिन शनि अमावस्या भी होने से शनिदेव की पूजा और दान का महत्व भी बढ़ जाता है।

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वट सावित्री

गंगा दशहरा: आस्था और पुण्य का पर्व
25 मई को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस दिन गंगा स्नान, दान, जप-तप और उपवास करने से पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है।

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गंगा दशहरा

निर्जला एकादशी: सबसे महत्वपूर्ण व्रत
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी मनाई जाती है, जो इस वर्ष 25 जून को पड़ रही है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है और मान्यता है कि इस एक व्रत से साल भर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है।

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निर्जला एकादशी

धार्मिक और सामाजिक महत्व
ज्येष्ठ माह में तप, दान और सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। भीषण गर्मी के बीच प्यासे लोगों को पानी पिलाना, छाया की व्यवस्था करना और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्य कार्य माना जाता है। यही कारण है कि इस महीने में जगह-जगह जलसेवा, भंडारे और धार्मिक आयोजन देखने को मिलते हैं।

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