Chhattisgarhजाँजगीर -चाँपा

माघी पूर्णिमा स्नान के साथ छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े मेले का शुभारंभ

त्रिवेणी संगम में आस्था का सैलाब, भजन-कीर्तन और शाही स्नान के बीच महाशिवरात्रि तक चलने वाले राज्य के सबसे बड़े मेले की शुरुआत

जांजगीर चाम्पा। सबरी नारायण–नारायण हरि–हरि, तेरी लीला सबसे न्यारी–न्यारी के जयघोष के बीच माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिवरीनारायण में छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे बड़े और ऐतिहासिक मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। यह मेला महाशिवरात्रि तक निर्बाध रूप से संचालित होगा।
शिवरीनारायण न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष के प्राचीनतम तीर्थ स्थलों में प्रमुख स्थान रखता है। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में इस पुण्य भूमि से होकर गुजरे थे। यह स्थल माता शबरी की तपोभूमि के रूप में भी विख्यात है। भक्त और भगवान के नाम पर इस नगर का नाम सबरी नारायण पड़ा, जिसे आज शिवरीनारायण के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जहां स्वयं प्रभु के चरण पड़े हों, वहां केवल दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी रामचरितमानस में कहा है—
“सन्मुख होई जीव मोहि जबहिं, जन्म कोटि अघ नासहिं तबहिं।”


रातभर गूंजता रहा भजन-कीर्तन
माघी पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर शिवरीनारायण पूरी तरह भक्ति में डूबा रहा। चौक-चौराहों, गलियों और मठ-मंदिरों में रातभर भजन-कीर्तन और रामायण पाठ चलता रहा। श्रद्धालु पूरी रात भगवान का नाम स्मरण करते हुए पुण्य अर्जित करते रहे और तड़के त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए उमड़ पड़े।


राजेश्री महन्त जी ने तड़के किया संगम स्नान
श्री शिवरीनारायण मठ के पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने परंपरा के अनुसार सुबह 3 बजे त्रिवेणी संगम स्थित बाबा घाट में अपने सहयोगियों के साथ स्नान किया। इस दौरान चित्त्रोत्पला गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना एवं दीपदान किया गया। श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में महानदी में दीपदान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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सुबह 4 बजे खुले भगवान के पट
स्नान-ध्यान के उपरांत सुबह 4 बजे नर-नारायण मंदिर के पट खोले गए। भगवान श्री शिवरीनारायण का भव्य मंगल श्रृंगार एवं आरती संपन्न हुई। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। घंटों प्रतीक्षा के बाद भक्तों ने भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना।


जगन्नाथ मंदिर में विधिवत पूजा
नर-नारायण मंदिर में पूजा के पश्चात राजेश्री महन्त जी महाराज मठ परिसर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचे, जहां विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को तुलसी पत्र का प्रसाद वितरित किया गया।


खिचड़ी भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
मठ मंदिर प्रांगण में समाजसेवियों के सहयोग से खिचड़ी प्रसाद का विशाल भंडारा आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ का प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान प्रसिद्ध कहावत “जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ” साकार होती नजर आई।

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शाही स्नान की परंपरा का हुआ निर्वाह
सुबह 11 बजे शिवरीनारायण की प्राचीन शाही स्नान परंपरा का भी निर्वाह किया गया। राजेश्री महन्त जी महाराज, संत-महात्मा एवं नगरवासी बाजे-गाजे के साथ त्रिवेणी संगम पहुंचे। स्नान व दीपदान के पश्चात सभी श्रद्धालु शोभायात्रा के रूप में मठ की ओर रवाना हुए।

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माघी पूर्णिमा स्नान, दर्शन-पूजन के साथ शिवरीनारायण के ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ हो चुका है। मेले में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु सपरिवार पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बना—
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज, अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।”

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