Chhattisgarh

आपातकाल स्मृति दिवस पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, मुख्यमंत्री ने किया ‘आपातकाल के योद्धा’ स्मारिका का विमोचन

रायपुर में आयोजित समारोह में लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया गया याद, निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी मिला सम्मान

🔴 Aaj Ki Baat News | रायपुर

राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में रविवार को आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका ‘आपातकाल के योद्धा’ का विमोचन किया। इस दौरान आपातकाल विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।

लोकतंत्र केवल शासन नहीं, जीवन मूल्य है : इंद्रेश कुमार

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है, जिसे प्रत्येक नागरिक को समझना और निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र की कठिन परीक्षा का दौर था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्रभावित हुए थे। लोकतंत्र सेनानियों ने जेल और यातनाएं सहकर भी लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवित रखा। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, स्वच्छता और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि भारत अपनी संस्कृति और मूल्यों के बल पर दुनिया में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकता है।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए सेनानियों ने दिया अभूतपूर्व योगदान : मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा अध्याय है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र सेनानियों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष, त्याग और कठिन जेल जीवन का सामना किया। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को लोकतंत्र के महत्व से अवगत कराना भी है। मुख्यमंत्री ने अपने पारिवारिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय 19 महीने तक जेल में रहे थे। उस दौर में परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन स्वयंसेवकों ने लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों तक सहायता पहुंचाने का कार्य किया।

आपातकाल लोकतंत्र के प्रति सजग रहने की सीख देता है : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था। प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों ने लोकतंत्र की मूल भावना को प्रभावित किया। यह कालखंड हमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सदैव जागरूक और सजग रहने की प्रेरणा देता है।

निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को मिला सम्मान

आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यालय स्तर पर “आपातकाल कभी विस्मृत न हो” विषय में रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान प्राप्त कर 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और स्मृति चिन्ह हासिल किया। वहीं महाविद्यालय स्तर पर “25 जून : संविधान हत्या दिवस” विषय में रायपुर की कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय तथा दुर्ग की खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को सम्मानित करते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति युवाओं की जागरूकता की सराहना की।

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक गोमती साय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, लोकतंत्र सेनानी, उनके परिजन और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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