पामगढ़ में सियासी भूचाल: सीएम के कोसला जनचौपाल में विपक्षी विधायक को एंट्री से रोका, कलेक्टर-एसपी के फोन पर उठे सवाल

विधायक शेषराज हरवंश का गंभीर आरोप; बोलीं- ‘कलेक्टर-एसपी ने फोन कर कहा आपका रहना सही नहीं’, पूछा- क्या सरकारी कार्यक्रम भाजपा का निजी आयोजन है?
जांजगीर-चांपा। जिले के पामगढ़ विधानसभा अंतर्गत ग्राम कोसला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जनचौपाल कार्यक्रम के दौरान एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय कांग्रेस (विपक्षी) विधायक शेषराज हरवंश ने आरोप लगाया है कि उन्हें मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने से जिला प्रशासन द्वारा जानबूझकर रोका गया। विधायक ने इस पूरी कार्रवाई को लोकतंत्र का दमन और एक महिला जनप्रतिनिधि का घोर अपमान करार दिया है।
कलेक्टर-एसपी के फोन कॉल से बढ़ा विवाद
विधायक शेषराज हरवंश ने मीडिया के सामने बेहद आहत और आक्रोशित होकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया, “मैं अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर कोसला में आयोजित मुख्यमंत्री के जनचौपाल में शामिल होने पहुंची थी। लेकिन मुख्यमंत्री के पहुंचने के ठीक पहले जिले के कलेक्टर (जन्मेजय महोबे) और एसपी (श्रीमती निवेदिता पाल) का मेरे पास फोन आया। अधिकारियों ने मुझसे कहा कि यह मुख्यमंत्री जी का गोपनीय कार्यक्रम है, आपका यहाँ होना सही नहीं है। आपके रहने से हमारे लिए समस्या खड़ी हो जाएगी।”
विधायक ने दागे तीखे सवाल, सरकार को घेरा
विपक्षी विधायक ने इस दुर्व्यवहार को लेकर सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला नौकरशाही को कटघरे में खड़ा करते हुए तीन तीखे सवाल दागे हैं:
1 मेरे साथ यह दुर्व्यवहार माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेश पर हुआ है या जिला प्रशासन ने अपनी मर्जी से चाटुकारिता में यह कृत्य किया है?
2 क्या जनचौपाल में केवल सत्ताधारी पार्टी के पदाधिकारियों को ही बैठने का अधिकार है? अगर कार्यक्रम गोपनीय था, तो भाजपा के तमाम नेता वहां कैसे मौजूद थे?
3 क्या छत्तीसगढ़ में विपक्ष के चुने हुए विधायकों को सिर्फ अपमानित करने की नई परंपरा शुरू की जा रही है?
लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत
विधायक ने कहा कि जनता द्वारा चुनी गई एक महिला विधायक के साथ जिला प्रशासन का ऐसा रवैया बेहद शर्मनाक है और यह साफ करता है कि साय सरकार विपक्ष का सामना करने से डर रही है। उन्होंने इसे पामगढ़ की जनता का अपमान बताते हुए पूछा है कि क्या अब मुख्यमंत्री इस शर्मनाक कृत्य पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करेंगे या मौन रहकर इस तानाशाही को अपनी सहमति देंगे। इस घटना के बाद से क्षेत्र का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है।




