रक्षाबंधन पर 95 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, भद्रा मुक्त रहेगा दिन, जानिए राखी बांधने के श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त

शतभिषा नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के बीच मनेगा रक्षाबंधन
जांजगीर-चांपा। 28 अगस्त 2026। सावन मास के समापन और श्रावणी पूर्णिमा के पावन अवसर पर 28 अगस्त को भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन उल्लासपूर्वक मनाया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार करीब 95 वर्षों बाद इस पर्व पर ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इससे पूर्व वर्ष 1931 में बना था। इस दिन शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग रहने से पर्व की महत्ता काफी बढ़ गई है। त्योहार को लेकर बाजारों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर लोगों की खासी चहल-पहल बनी हुई है।
भद्रा और चंद्रग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव
पंचांग के अनुसार भद्रा काल 27 अगस्त की रात को ही समाप्त हो जाने के कारण 28 अगस्त को पूरे दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे बहनें सुबह से ही निश्चिंत होकर भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकेंगी। वहीं इस दिन पड़ने वाला चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने की वजह से इसका धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होगा।
राखी बांधने के लिए शुभ समय
शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार को राखी बांधने के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इसके पश्चात दोपहर 11:56 बजे से 12:48 बजे तक अभिजित मुहूर्त में भी पूजा-अर्चना और रक्षासूत्र बांधने का विधान संपन्न किया जा सकता है। पूजा की थाली में रोली, अक्षत, चंदन, दीपक और मिष्ठान सजाकर बहनें भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की मंगलकामना करेंगी। रक्षाबंधन के अगले दिन, शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की पहली तिथि पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक मितानी पर्व ‘भोजली’ का आयोजन किया जाएगा।



