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बड़ी खबर: अमित शाह का सीधा प्रहार “भूपेश बघेल ने नक्सलियों को दिया ‘संरक्षण’, सबूत दूँ क्या?” लोकसभा में मचा हड़कंप!


नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर चर्चा का जवाब देते हुए छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया है। शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर नक्सलियों को ‘संरक्षण’ देने का सीधा और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने सदन में चुनौती देते हुए कहा, “भूपेश बघेल को पूछो, प्रूफ दूँ क्या यहाँ पर? हाँ बोलें तो बोलो, वरना फँस जाओगे।”


31 मार्च 2026: नक्सलवाद की ‘डेडलाइन’ तय
गृह मंत्री ने देश के सामने एक ऐतिहासिक लक्ष्य रखा है। उन्होंने ऐलान किया कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पूरे भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया है। शाह ने स्पष्ट किया कि 2023 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद नक्सल विरोधी अभियानों में अभूतपूर्व तेजी आई है, जो कांग्रेस शासनकाल में ‘ठंडे बस्ते’ में थी।

“गरीबी ने नक्सलवाद नहीं, नक्सलवाद ने गरीबी फैलाई”
अमित शाह ने बस्तर और ‘रेड कॉरिडोर’ की सच्चाई बयां करते हुए कहा कि नक्सलवाद गरीबी का परिणाम नहीं, बल्कि एक हिंसक विचारधारा की साजिश है।
विकास में रोड़ा: नक्सलियों ने जानबूझकर स्कूल, बैंक और सड़कें बनने से रोकीं ताकि इलाका पिछड़ा रहे।
आदिवासियों को बरगलाया: भगवान बिरसा मुंडा को मानने वाले आदिवासियों को जबरन ‘माओ’ के पीछे चलने पर मजबूर किया गया।

मानवाधिकार के ‘ठेकेदारों’ को खरी-खरी
नक्सलियों की वकालत करने वाले बुद्धिजीवियों पर निशाना साधते हुए शाह ने तीखे सवाल किए:

“2000 लेख पढ़ने के बाद भी मुझे उन बच्चों का दर्द नहीं दिखा जिनका अपहरण कर नक्सली बनाया गया। उन किसानों की बात क्यों नहीं होती जिनके खेतों में बारूद बिछाकर उन्हें अपाहिज कर दिया गया? मानवतावाद एकतरफा नहीं हो सकता।”

निर्णायक युद्ध का शंखनाद
गृह मंत्री ने साफ कर दिया कि सरकार अब ‘बुलेट’ (गोली) के दम पर सत्ता चाहने वालों के खिलाफ निर्णायक युद्ध लड़ रही है। सुरक्षा बलों को पूरी छूट दी गई है और अब नक्सली विचारधारा का अंत सुनिश्चित है।

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