सोलर ऊर्जा में बड़ी क्रांति! अब कम पैनलों से बनेगी ज्यादा बिजली

वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक, सोलर पैनलों की क्षमता 34% तक बढ़ने की उम्मीद
नई दिल्ली। दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही सौर ऊर्जा की मांग के बीच वैज्ञानिकों ने सोलर पैनलों को अधिक शक्तिशाली और किफायती बनाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। नई तकनीक की मदद से अब कम सोलर पैनल लगाकर भी पहले से ज्यादा बिजली पैदा करना संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज आने वाले समय में घरेलू और औद्योगिक स्तर पर बिजली संकट कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
क्या है नई तकनीक?
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित “पेरोव्स्काइट-सिलिकॉन टैंडम” तकनीक को सोलर ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस तकनीक में दो अलग-अलग प्रकाश सोखने वाले पदार्थों का उपयोग किया जाता है, जिससे सूर्य की किरणों से अधिक ऊर्जा हासिल की जा सकती है। नई प्रणाली में ऊपरी परत हाई-एनर्जी ब्लू और अल्ट्रा वायलेट किरणों को सोखती है, जबकि नीचे लगी सिलिकॉन लेयर रेड और इंफ्रारेड रोशनी को अवशोषित करती है। दोनों परतें मिलकर ज्यादा बिजली उत्पादन करती हैं।
उत्पादन प्रक्रिया हुई आसान
पहले इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने में काफी तकनीकी दिक्कतें आती थीं। सिलिकॉन सतह पर पेरोव्स्काइट की पतली परत तैयार करने में अधिक समय और खर्च लगता था। अब वैज्ञानिकों ने “क्लोज-स्पेस सबलिमेशन” प्रक्रिया में सुधार कर इस समस्या का समाधान खोज लिया है। नई तकनीक में बिना किसी तरल रसायन के बेहद कम समय में समान और मजबूत कोटिंग तैयार की जा सकती है।
सिर्फ 10 मिनट में तैयार होगी लेयर
रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार नई प्रक्रिया इतनी तेज है कि पेरोव्स्काइट लेयर केवल 10 मिनट में सिलिकॉन सतह पर तैयार हो जाती है। यह तकनीक विभिन्न प्रकार की सतहों पर समान रूप से काम करती है और इससे बने सोलर सेल्स की कार्यक्षमता 34 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे सामान्य सोलर पैनलों से काफी ज्यादा है।
उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा
नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि लोगों को अब ज्यादा संख्या में भारी सोलर पैनल लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कम जगह में कम पैनलों से ज्यादा बिजली तैयार की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सौर ऊर्जा सस्ती होगी और भविष्य में बिजली उत्पादन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।




