Chhattisgarhnationalजाँजगीर -चाँपाधर्म भक्ति

सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को: पितृ दोष से मुक्ति के लिए करें ये आसान काम, घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर होगा पितृ पक्ष का समापन; तर्पण, पंचबली भोग और दीपदान से प्रसन्न होते हैं पूर्वज

🔴 आज की बात News | धर्म डेस्क। सनातन धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का महापर्व ‘पितृ पक्ष’ आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को संपन्न होता है। इसे सर्व पितृ अमावस्या या पितृ विसर्जनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष 10 अक्टूबर 2026 को सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाएगी। जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, उनके निमित्त भी इसी दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए विशेष धार्मिक अनुष्ठान और दान-पुण्य से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।

1. पितृ मंत्रों का जाप और पितृ चालीसा का पाठ

सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण करते हुए मंत्रों का विधिवत जाप करने की परंपरा है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका शुभाशीर्वाद बना रहता है। इस दिन श्रद्धालु इन प्रमुख मंत्रों का जाप कर सकते हैं:

  • ॐ पितृभ्यः नमः
  • ॐ श्री सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेशं हं हं सुख शान्तिं देहि फट् स्वाहा
  • ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।

इसके साथ ही इस दिन पितृ चालीसा या गरुड़ पुराण के चयनित अंशों का पाठ करना भी बेहद पुण्यदायी माना जाता है।

2. पितृ तीर्थ से विधिवत जल तर्पण

इस पावन तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण करना सबसे महत्वपूर्ण कर्म माना गया है। शास्त्रों के अनुसार तर्पण करते समय व्यक्ति को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। तांबे या पीतल के पात्र में जल लेकर उसमें काले तिल, कच्चा दूध, कुश और अक्षत मिलाया जाता है। इसके बाद हाथ के अंगूठे और तर्जनी उंगली के मध्य भाग (जिसे पितृ तीर्थ कहा जाता है) से पितरों को जल अर्पित किया जाता है।

3. पीपल वृक्ष के नीचे दीपदान

धार्मिक मान्यताओं में पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों के साथ-साथ पितरों का वास माना गया है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन सुबह के समय पीपल के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध और जल अर्पित करें। इसके बाद संध्याकाल में पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करने की परंपरा है। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन के संकट दूर होते हैं।

4. पंचबली भोग और अन्न दान

अमावस्या के दिन जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को सामर्थ्य अनुसार भोजन कराना व अन्न दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त सनातन परंपरा में ‘पंचबली’ यानी गाय, श्वान (कुत्ता), कौवा, चींटी और देवताओं के लिए भोजन निकालने का विशेष विधान है। पितृ पक्ष के अंतिम दिन इन मूक जीवों को भोजन कराने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।

5. दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक प्रज्वलित करें

वास्तु और धार्मिक परंपराओं के अनुसार दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है। सर्व पितृ अमावस्या की शाम को घर के दक्षिण कोने या मुख्य द्वार की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक अवश्य जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय पूर्वजों का स्मरण करते हुए परिवार की अनजानी भूलों के लिए क्षमा याचना करें। मान्यता है कि इससे पितृ अपने लोक को लौटते समय संतुष्ट होकर घर-परिवार को समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

यदि किसी कारणवश सभी नियमों का पालन करना संभव न हो, तो सच्चे मन से किया गया स्मरण, जल तर्पण और एक जरूरतमंद को दिया गया भोजन भी पितृ कृपा प्राप्त कराने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

Related Articles

Back to top button