डीएपी की कमी के बीच कृषि विभाग की सलाह, किसान अपनाएं वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग

संतुलित उर्वरक उपयोग से बेहतर होगी मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादन, कृषि विभाग ने जारी की वैकल्पिक उर्वरकों की सूची
जांजगीर-चांपा। खरीफ सीजन को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को डीएपी के स्थान पर अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि वर्तमान में डीएपी के आयात पर निर्भरता और उपलब्धता में कमी को देखते हुए किसानों को संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए, ताकि फसल उत्पादन प्रभावित न हो और मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहे।

उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि धान सहित खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए केवल डीएपी पर निर्भर रहना उचित नहीं है। किसानों को यूरिया, सुपर फॉस्फेट, पोटाश, एनपीके जैसे संतुलित उर्वरकों का निर्धारित मात्रा में उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि एक बोरी डीएपी के विकल्प के रूप में किसान तीन बोरी एसएसपी और 20 से 25 किलोग्राम यूरिया, या डेढ़ बोरी एनपीके (12:32:16) का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा दो बोरी अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट (20:20:0:13) अथवा एक बोरी टीएसपी के साथ दो बोतल नैनो यूरिया और दो बोतल नैनो डीएपी का उपयोग भी प्रभावी विकल्प माना गया है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि आगामी खरीफ सीजन में उपलब्ध वैकल्पिक उर्वरकों का उपयोग कर डीएपी की कमी की पूर्ति करें तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त करें।





