जाँजगीर -चाँपा

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़: जांजगीर में कार्यशाला का आयोजन, बाल विवाह कराने या शामिल होने पर होगी 2 साल की जेल

जांजगीर-चांपा। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान को सफल बनाने के लिए जिला पंचायत सभाकक्ष में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जिले को बाल विवाह की कुप्रथा से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया।


301 ग्राम पंचायतें हुईं बाल विवाह मुक्त
कार्यशाला में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनिता अग्रवाल ने बताया कि जिले में बाल विवाह रोकने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान में जांजगीर-चांपा जिले की 301 ग्राम पंचायतों और 2 नगरीय निकायों को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है।


कठोर दंड का प्रावधान: जेल और जुर्माना
मास्टर ट्रेनर और यूनिसेफ के स्टेट कोआर्डिनेटर श्री शशांक शर्मा ने कानून की बारीकियों से अवगत कराते हुए बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है: बाल विवाह कराने वाले या उसमें शामिल होने वाले व्यक्तियों को 02 वर्ष का सश्रम कारावास। 01 लाख रुपये का अर्थदंड या जेल और जुर्माना दोनों।

कौन आएगा दायरे में? शादी कराने वाले पुरोहित, टेंट हाउस संचालक, फोटोग्राफर, हलवाई, बैंड-बाजा वाले और इसमें सम्मिलित होने वाले अन्य सभी लोग दोषी माने जाएंगे।


रामनवमी और अक्षय तृतीया पर रहेगी विशेष नजर
आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रशासन ने विशेष तैयारी की है: रामनवमी और अक्षय तृतीया के अवसर पर सभी ग्राम पंचायतों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जाएगी। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत भवनों में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। बाल विवाह रोकने के लिए जन-आंदोलन खड़ा करने और टास्क फोर्स के गठन पर जोर दिया गया है।


कार्यशाला में इनकी रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य राजकुमार साहू, उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती सतरूपा तारण, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष गणेश प्रसाद शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेन्द्र सिंह जायसवाल सहित यूनिसेफ के प्रतिनिधि, यूवोदय वॉलेंटियर्स और महिला एवं बाल विकास विभाग के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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