शासन की किसान हितैषी योजनाओं से आत्मनिर्भर बने संजय साहू

धान की परंपरागत खेती छोड़ नवाचार अपनाया, ग्राफ्टेड बैंगन से बनी पहचान, हो रही सालाना 4 लाख से अधिक की कमाई
जांजगीर-चांपा, 16 अप्रैल 2026। कभी परंपरागत खेती पर निर्भर रहने वाले पामगढ़ तहसील के ग्राम बिलारी के किसान संजय कुमार साहू की जिंदगी आज पूरी तरह बदल चुकी है। सीमित संसाधनों और पारंपरिक धान खेती से जहां आय सीमित थी, वहीं आज आधुनिक खेती तकनीकों और शासन की योजनाओं के सहारे वे आत्मनिर्भर बन चुके हैं। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। संजय साहू बताते हैं कि पहले वे भी अन्य किसानों की तरह सिर्फ धान की खेती करते थे। इसी बीच उन्होंने कुछ नया करने का निर्णय लिया और अपने एक एकड़ खेत में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की। शुरुआत में चुनौतियां आईं, लेकिन मेहनत और सीखने की जिद ने उन्हें आगे बढ़ाया। आज वे पिछले चार वर्षों से लगातार ग्राफ्टेड बैंगन की खेती कर रहे हैं और हर साल बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। वे रासायनिक कीटनाशकों के बजाय ऑर्गेनिक कीटनाशकों का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी फसल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होती है। इस कार्य में उनकी पत्नी भी बराबर की भागीदारी निभा रही है। जिससे यह खेती उनके परिवार के लिए एक मजबूत आजीविका का साधन बन गई है। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने उनकी आय में बड़ा बदलाव लाया है। जहां पहले धान की खेती से सीमित आमदनी होती थी, वहीं अब उन्हें सालाना 4 लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। आय बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की योजनाएं अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गई हैं।श्री साहू ने खेती में आधुनिक तकनीकों को भी अपनाया है। ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और प्लास्टिक मल्चिंग के उपयोग से उन्होंने पानी की बचत के साथ उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया है। उन्हें उद्यानिकी विभाग से ग्राफ्टेड पौधे, मल्चिंग, स्प्रिंकलर पाइप और पैक हाउस के लिए अनुदान मिला, जिससे उनकी लागत कम हुई और काम आसान हुआ। साथ ही सौर सुजला योजना के तहत मिले सोलर पंप ने उनकी सिंचाई की समस्या को लगभग समाप्त कर दिया। आज उनकी फसल स्थानीय बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती है और उनकी पहचान एक प्रगतिशील किसान के रूप में बन चुकी है। उनकी कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नई संभावनाओं को अपनाना चाहते हैं।




