ईरान ने ठुकराया अमेरिका का शांति प्रस्ताव, युद्ध रोकने के लिए रख दीं 5 शर्तें!

डिजिटल डेस्क: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में झुकने वाला नहीं है। ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने सरकारी मीडिया के जरिए दुनिया को संदेश दिया है कि जब तक उनकी निर्धारित शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक युद्ध विराम का सवाल ही पैदा नहीं होता।
ट्रंप या बाहरी दबाव का असर नहीं
ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युद्ध कब खत्म होगा, यह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या कोई अन्य बाहरी ताकत तय नहीं करेगी। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत का दिखावा करता है और दूसरी तरफ सैन्य हमले जारी रखता है। ईरान के मुताबिक, अमेरिका की कूटनीति जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।
ईरान की 5 शर्तें: जिनके बिना नहीं रुकेगी जंग
ईरान ने क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए भेजे गए अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज करते हुए अपनी पांच प्रमुख मांगें सामने रखी हैं:
- हमलों पर पूर्ण रोक: दुश्मन की आक्रामक कार्रवाई और टारगेटेड हत्याएं (Targeted Killings) तुरंत और पूरी तरह बंद होनी चाहिए।
- स्थाई सुरक्षा की गारंटी: भविष्य में दोबारा युद्ध न छिड़े, इसके लिए एक ठोस और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाई जाए।
- युद्ध क्षतिपूर्ति: युद्ध से हुए जान-माल के नुकसान का पूरा हर्जाना और भुगतान की स्पष्ट लिखित गारंटी देनी होगी।
- सभी मोर्चों पर शांति: युद्ध का अंत केवल एक जगह नहीं, बल्कि इस संघर्ष में शामिल सभी समूहों और मोर्चों पर एक साथ लागू होना चाहिए।
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अधिकार: सबसे अहम शर्त में ईरान ने कहा है कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर उसकी संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाए और दूसरे देश अपने वादों को निभाने की गारंटी दें।
ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक ये शर्तें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक सीजफायर संभव नहीं है। उसने संकेत दिया है कि वह अपनी रक्षा के लिए लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार है और सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। इस कड़े रुख के बाद खाड़ी देशों में तनाव और बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और गैस सप्लाई पर पड़ सकता है।




