शिवरीनारायण: राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास ने किया डेंटल केयर एंड फिजियोथैरेपी का शुभारंभ; बटुकों के उपनयन संस्कार में भी हुए शामिल

जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित संत राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने अपने एक दिवसीय जिला प्रवास के दौरान धर्मनगरी शिवरीनारायण में स्वास्थ्य और संस्कार के दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शिरकत की। उन्होंने केरा रोड स्थित ‘बीआर साहू नर्सिंग होम हॉस्पिटल, डेंटल केयर एंड फिजियोथैरेपी’ का भव्य उद्घाटन किया और ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित बटुकों के जनेऊ संस्कार कार्यक्रम में शामिल होकर आशीर्वाद प्रदान किया।
“मातृभूमि की सेवा ही सबसे बड़ा संस्कार” – राजेश्री महन्त
अस्पताल के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राजेश्री महन्त जी ने कहा कि यह गौरव की बात है कि ग्राम तुस्मा के निवासी डॉक्टर भाई-बहन ने अपनी जन्मभूमि को सेवा का केंद्र बनाया है। उन्होंने इसे माता-पिता के उच्च संस्कारों का प्रतिफल बताया।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्या लता मिरी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आज के दौर में जहाँ लोग शहरों की ओर भाग रहे हैं, वहीं डॉ. नवीन साहू और डॉ. रेणुका साहू का अपने पैतृक क्षेत्र में अस्पताल खोलना प्रशंसनीय है। उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा भी दिलाया।
विशेष उपस्थिति: कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया, डॉ. चौलेश्वर चंद्राकर और डॉ. शिवनारायण द्विवेदी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर निरंजन लाल अग्रवाल, योगेश शर्मा और सरिता धन्नु साहू सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
भजन संध्या और आत्मीय स्वागत
अस्पताल के संचालक डॉ. नवीन साहू और डॉ. रेणुका साहू सहित पूरे साहू परिवार ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। उद्घाटन के उपलक्ष्य में एक भव्य भजन संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसका संचालन बलराम पटेल ने किया।

बटुकों को मिला आशीर्वाद
इसके पूर्व, राजेश्री महन्त जी महिला ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित उपनयन (जनेऊ) संस्कार कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। यहाँ उन्होंने बटुकों को संस्कारवान जीवन जीने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में वीरेंद्र तिवारी, सुबोध शुक्ला, सुशील मिश्रा, संजय शर्मा और सुधीर मिश्रा सहित समाज के प्रमुख जन उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव ने बताया कि महाराज जी का यह प्रवास क्षेत्र के विकास और आध्यात्मिक चेतना के लिए महत्वपूर्ण रहा।





