श्री कृष्ण रंग भरो प्रतियोगिता में ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने मारी बाजी, शील्ड जीतकर बढ़ाया मान

ज्ञानोदय स्कूल में आयोजित प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन; नर्सरी से लेकर 11वीं तक के छात्र-छात्राओं ने लहराया परचम
🔴 आज की बात News | जांजगीर चाम्पा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ज्ञानोदय स्कूल जांजगीर द्वारा आयोजित ‘श्री कृष्ण रंग भरो प्रतियोगिता’ में ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, बनारी (जांजगीर) के विद्यार्थियों ने अपनी कला और रचनात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शानदार सफलता हासिल की है। विभिन्न आयु वर्गों में आयोजित इस स्पर्धा में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार जीतकर अपने स्कूल का नाम गौरवान्वित किया है।
विद्यार्थियों में कला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस प्रतियोगिता को चार अलग-अलग आयु वर्गों में विभाजित किया गया था। इसमें प्री-प्राइमरी से केजी-2, कक्षा पहली से पांचवीं, कक्षा छठवीं से आठवीं और कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठित स्कूलों के बच्चों के बीच ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने रंगों के संयोजन और कल्पनाशीलता के जरिए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों व चित्रों को बेहद जीवंत और सुंदर रूप प्रदान किया।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को आयोजकों द्वारा शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसमें नर्सरी कक्षा के फ्रेयल साहू और सातवीं के क्षितिज नामदेव ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं छठवीं के आराध्य अग्रवाल और नवमीं की निष्ठा अग्रवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा केजी-2 के आदविक अग्रवाल, चौथी की अदिति राठौर, नवमीं की प्रियांशी अग्रवाल तथा ग्यारहवीं की समृद्धि पांडे एवं दिव्यांशी कंवर ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए सांत्वना पुरस्कार अपने नाम किया।
संस्था संचालक आलोक अग्रवाल, डॉ. गिरिराज गढ़ेवाल एवं प्राचार्या श्रीमती सोनाली सिंह के कुशल मार्गदर्शन में मिली इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार में हर्ष का माहौल है। शाला प्रबंधन एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सभी विजेता प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रबंधन ने कहा कि इस तरह की पाठ्येतर गतिविधियां बच्चों में कलात्मक सोच, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने में अहम भूमिका निभाती हैं। विद्यार्थियों की इस सफलता से अन्य बच्चों को भी रचनात्मक मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेने की प्रेरणा मिली है।




