शासकीय महाविद्यालय बतौली में हिंदी दिवस समारोह: संवाद और भाव अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है हिंदी – साहित्यकार शशि मित्तल

प्रेमचंद के विचारों पर पोस्टर प्रदर्शनी का हुआ आयोजन, विशेषज्ञों ने भाषा विकास और रोजगार के अवसरों पर दिया व्याख्यान
🔴 आज की बात News | बतौली। शासकीय महाविद्यालय बतौली में 17 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यशाला एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि साहित्यकार एवं समाजसेवी शशि मित्तल रहीं, जबकि अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. आर. भगत ने की। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने मुंशी प्रेमचंद के विचारों पर आधारित आकर्षक पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और अपने विचार साझा किए।
अध्ययनशीलता और पठन संस्कृति को बढ़ाएं विद्यार्थी: शशि मित्तल
मुख्य अतिथि शशि मित्तल ने ‘हिंदी का विकास और महत्व’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद का जरिया नहीं, बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को अध्ययनशीलता बढ़ाने और नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि उमेश कुमार गुप्ता ने हिंदी को जीवन का अनिवार्य अंग बताते हुए व्यापार और राजकाज में इसकी सहजता को रेखांकित किया, वहीं सोमा गुप्ता ने अपनी कविताओं का पाठ कर हिंदी को सांस्कृतिक एकता की कड़ी बताया।
पीपीटी से समझाई विकास यात्रा, रोजगार के बताए अवसर
कार्यशाला के प्रथम सत्र में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के विकासखंड समन्वयक चंद्रभान ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के माध्यम से ‘हिंदी भाषा का महत्व एवं ऐतिहासिक यात्रा’ पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने लेखन, वाचन और अभिव्यक्ति कौशल को निखारने के गुर सिखाए। वहीं राजनीति विज्ञान के अतिथि शिक्षक गोपाल यादव ने वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के विविध अवसरों पर जानकारी दी।
प्रेमचंद पोस्टर प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम की शुरुआत सोनमति यादव एवं कुंती पैकरा द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गीत की प्रस्तुति से हुई। हिंदी साहित्य विकास परिषद के अध्यक्ष ललित पैकरा, कुंती पैकरा, हरकेश साहू, हरिनारायण, आदित्य गिरि, बिंदिया एक्का और सोनमति यादव ने प्रेमचंद प्रदर्शनी पर विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन विभागाध्यक्ष प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने किया, जिन्होंने आर्य भाषा परिवार से खड़ी बोली के मानकीकरण तक की यात्रा पर प्रकाश डाला।
आभार प्रदर्शन प्रो. मधुलिका तिग्गा ने किया। इस दौरान प्रो. सुभागी भगत, शिल्पी एक्का, मनीषा एक्का सहित एनईपी और स्वीप कैंपस एंबेसडर व महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।




