बाल विवाह एक अभिशाप: कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं से कुप्रथा मिटाने में मांगी मदद

जांजगीर-चांपा | 23 मार्च 2026। आगामी रामनवमी और अक्षय तृतीया के पर्व को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने जिले के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अशिक्षा और भ्रांतियों के कारण होने वाला बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर लगने वाला एक गहरा दाग भी है।
क्यों है बाल विवाह समाज के लिए खतरा?
कलेक्टर ने बाल विवाह के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि:कम उम्र में विवाह से बालिकाओं का शारीरिक विकास रुक जाता है और वे गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकती हैं। जल्दी मां बनने के कारण शिशु और प्रसूता मृत्यु दर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नवजात अक्सर कुपोषण का शिकार होते हैं। बाल विवाह के कारण बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते, जिससे उनके आत्मनिर्भर होने की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त सजा के प्रावधान हैं: लड़के के लिए 21 वर्ष और लड़की के लिए 18 वर्ष से कम आयु में विवाह प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर 2 वर्ष का कठोर कारावास या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों हो सकते हैं। सहयोगियों पर भी गाज: विवाह कराने वाले पंडित, हलवाई, टेंट हाउस संचालक और मेहमानों पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जागरूक नागरिक बनें, यहाँ दें सूचना
कलेक्टर श्री महोबे ने आमजनों से आग्रह किया है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की तैयारी की सूचना मिले, तो तत्काल निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क करें: चाइल्ड लाइन: 1098
पुलिस सहायता: 112 या 100




