सम्मान: 10 साल तक पुरस्कारों से बनाई दूरी, अब डॉ. राघवेंद्र पाण्डेय को एक साथ मिले 5 राष्ट्रीय सम्मान

जांजगीर-चांपा: अपनी सेवा और सिद्धांतों के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. राघवेंद्र पाण्डेय को सामाजिक समरसता और जन-कल्याण के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया गया है। नई दिल्ली स्थित भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों ने उन्हें एक साथ पांच प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा है।
इन बड़े सम्मानों से हुए विभूषित
डॉ. पाण्डेय को उनकी दीर्घकालिक समाज सेवा के लिए निम्नलिखित सम्मानों के प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए हैं:
भारत गौरव रत्न
पद्मश्री ग्लोबल
भारत प्रतिभा अवार्ड
डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पुरस्कार
एक दशक का ‘मौन संकल्प’ हुआ पूरा
डॉ. पाण्डेय के जीवन का सबसे प्रेरक पहलू उनकी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा है। उन्हें पिछले एक दशक (10 साल) में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने हर बार विनम्रतापूर्वक इन्हें यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि “अभी कुछ जिम्मेदारियां बाकी हैं, उन्हें पूरा करने से पहले मैं कोई सम्मान स्वीकार नहीं करूँगा।” निरंतर 30 वर्षों की सेवा और 10 साल के लंबे संकल्प के बाद अब उन्होंने इन पुरस्कारों को ग्रहण किया है।
शिक्षा और जन-सरोकार के सजग प्रहरी
डॉ. पाण्डेय ने गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत बड़े निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए भगीरथ प्रयास किए हैं, जिसके लिए शिक्षा विभाग ने भी उन्हें सम्मानित किया है। छात्र जीवन में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के सक्रिय सिपाही रहे डॉ. पाण्डेय ने समाज में हिंसा और नशाखोरी के खिलाफ भी व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए हैं।
क्षेत्र में हर्ष की लहर
डॉ. पाण्डेय को मिली इस पंचकोणीय राष्ट्रीय उपलब्धि पर जांजगीर-चांपा जिले के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे जिले का गौरव बताया है।




