रामावतार जग्गी हत्याकांड: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को उम्रकैद

डिजिटल डेस्क। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (अपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया।
निचली अदालत का फैसला पलटा
हाई कोर्ट का यह निर्णय वर्ष 2007 में आए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह बदल देता है। उस समय रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक को अलग कर बरी करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने इसे गंभीर कानूनी त्रुटि माना।
उम्रकैद के साथ जुर्माना
अमित जोगी को आजीवन कारावास के साथ 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।
क्या है पूरा मामला
4 जून 2003 को रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो बाद में सरकारी गवाह बन गए।
सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ रामावतार जग्गी के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया, जहां अब इस पर अंतिम फैसला सुनाया गया।
कौन थे रामावतार जग्गी
रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी सहयोगी थे। वे नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) में कोषाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके थे।




