छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं के लिए सख्त कानून पास: गड़बड़ी करने वालों को होगी 10 साल की जेल और 1 करोड़ का जुर्माना

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विधानसभा में एक ऐतिहासिक और कड़ा कानून पारित किया है। अब सरकारी भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की नकल, पेपर लीक या धांधली करने वालों की खैर नहीं होगी। नए कानून के तहत दोषियों को 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री साय का कांग्रेस पर बड़ा हमला
विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने पीएससी (PSC) जैसी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार कर युवाओं के सपनों का कत्ल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में नौकरियों का सौदा किया गया, जिससे मेहनती अभ्यर्थी पीछे रह गए। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उनकी सरकार ने आते ही घोटालेबाजों को सलाखों के पीछे भेजा है और अब भविष्य में ऐसी गलती करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होगी।
नए कानून की मुख्य बातें:
कड़ी सजा: पेपर लीक करने या फर्जी परीक्षार्थी बैठाने पर 3 से 10 साल तक की जेल।
भारी जुर्माना: संगठित रूप से अपराध करने वाले गिरोहों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना।
संपत्ति होगी जब्त: परीक्षा में धांधली करने वाली संस्थाओं या गिरोहों की संपत्ति भी कुर्क की जा सकेगी।
परीक्षार्थियों पर कार्रवाई: नकल करने वाले अभ्यर्थी का रिजल्ट रद्द होगा और उस पर 3 साल तक परीक्षा देने पर रोक लगेगी।
हर परीक्षा पर लागू: यह कानून पीएससी (PSC), व्यापमं (Vyapam) समेत सभी सरकारी निगमों और मंडलों की भर्ती परीक्षाओं पर लागू होगा।
पारदर्शिता के लिए बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि इस कानून का मकसद परीक्षा प्रणाली में युवाओं का विश्वास फिर से बहाल करना है। उन्होंने कहा कि अब कोई भी परीक्षा माफिया छत्तीसगढ़ के युवाओं के हक पर डाका नहीं डाल पाएगा। प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी और लापरवाही करने वाली आईटी एजेंसियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
यह नया कानून उन हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है जो दिन-रात मेहनत कर सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया है कि अब केवल प्रतिभा को ही सम्मान मिलेगा।




