Chhattisgarhरायपुर

नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटलिटी’ से बाहर निकलना होगा : राज्यपाल रमेन डेका

पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

9,194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान, मेधावी छात्रों को मिले स्वर्ण पदक

रायपुर, 05 जून। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जो न केवल व्यक्ति बल्कि परिवार और समाज को भी प्रभावित कर रही है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटलिटी’ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल क्षणिक संतुष्टि प्राप्त होती है। राज्यपाल श्री डेका पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, बीपीटी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित विभिन्न संकायों के 7,545 स्नातक, 1,645 स्नातकोत्तर और 5 सुपर स्पेशियलिटी विद्यार्थियों सहित कुल 9,194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि दृढ़ संकल्प और अनुशासन के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन की बजाय खेल-कूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमित दायरे में रह रहे बच्चों की शारीरिक एवं मानसिक क्षमता प्रभावित हो रही है।

मरीजों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता हो

राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे प्रदेश की जनता के हितों के लिए जिम्मेदार हैं, उसी प्रकार चिकित्सकों का दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक का सफेद कोट सेवा, विश्वास और नैतिकता का प्रतीक है तथा उस पर कभी कोई दाग नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। चिकित्सकों को हर परिस्थिति में मरीज के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

फैमिली डॉक्टर की परंपरा फिर जीवित करने की जरूरत

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में पड़ोस और परिवार से जुड़े चिकित्सकों की आवश्यकता बढ़ गई है। पहले फैमिली फिजिशियन मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को अच्छी तरह समझते थे, जिससे उपचार अधिक प्रभावी होता था। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

एआई और टेलीमेडिसिन से बढ़ेंगी स्वास्थ्य सेवाएं

राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी इंटरनेट युग के छात्र हैं। विज्ञान और तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं लेकर आई है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकें दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण का आह्वान

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति, पशु और मानव के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

समाज और मानवता के प्रति दायित्व निभाने का समय : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई जिम्मेदारियों का संकल्प लेने का अवसर भी है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की प्रगति और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को खनिज और कृषि आधारित राज्य के साथ-साथ ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार और बस्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।

स्वास्थ्य सेवा सबसे बड़ी जिम्मेदारी : मंत्री जायसवाल

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

समारोह को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष एवं दीक्षांत वक्ता डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा ने भी संबोधित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। समारोह में विधायक पुरंदर मिश्रा, विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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