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15 जून को बनेगा अमृत-सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग, 27 साल बाद आई ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या

पुरुषोत्तम मास का होगा समापन, 16 जून से विवाह, गृह प्रवेश समेत सभी मांगलिक कार्यों को मिलेगी हरी झंडी

🔴 Aaj Ki Baat News | धर्म-आध्यात्म

धार्मिक दृष्टि से 15 जून का दिन बेहद खास और पुण्यदायी माना जा रहा है। ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या पर इस बार अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा विशेष योग करीब 27 वर्षों बाद देखने को मिल रहा है, जिसके चलते मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ, कथा एवं दान-पुण्य के आयोजन किए जा रहे हैं। वर्तमान में चल रहे पुरुषोत्तम मास के दौरान श्रद्धालु भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना में जुटे हुए हैं। सोमवार और अमावस्या का संयोग होने से इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।

हरि-हर की संयुक्त कृपा का माना जाता है दिन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जबकि सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। ऐसे में सोमवती अमावस्या पर हरि और हर के संयुक्त आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत, जप, तप, दान और पूजा-पाठ करने से विशेष पुण्य फल मिलने की मान्यता है।

सुबह से रहेगा अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग

पंचांग के अनुसार 15 जून को सुबह से ही अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहेंगे। साथ ही मृगशिरा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान किए गए धार्मिक अनुष्ठान, पितृ तर्पण, संकल्प और दान दीर्घकालिक शुभ फल प्रदान करते हैं। श्रद्धालुओं को तीर्थ स्नान, पीपल पूजन, गौ सेवा, हरा चारा दान तथा भगवान शिव का कच्चे दूध और काले तिल से अभिषेक करने की सलाह दी जा रही है।

15 जून को समाप्त होगा पुरुषोत्तम मास

17 मई से प्रारंभ हुए पुरुषोत्तम मास के चलते विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और उपनयन जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ था। 15 जून को अधिकमास समाप्त होने के साथ यह प्रतिबंध भी समाप्त हो जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के बाद 16 जून से शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत हो जाएगी। इसके साथ ही विवाह समारोहों, मांगलिक आयोजनों और धार्मिक कार्यक्रमों में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद है।

बाजारों में बढ़ेगी चहल-पहल

करीब एक माह से अधिक समय तक मांगलिक कार्यों पर लगी रोक के कारण विवाह और आयोजन से जुड़े कई व्यवसाय प्रभावित थे। अब शुभ मुहूर्त शुरू होने के बाद सराफा, कपड़ा, सजावट, टेंट, कैटरिंग और अन्य कारोबारों में भी तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अधिकमास लगभग हर 32 माह 16 दिन में आता है, लेकिन ज्येष्ठ अधिकमास में सोमवार के दिन अमावस्या का संयोग अत्यंत दुर्लभ होता है। वर्ष 2007 और 2018 में अधिकमास तो आया था, लेकिन उस दौरान सोमवती अमावस्या का ऐसा संयोग नहीं बना था। यही कारण है कि इस वर्ष का योग विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

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