पश्चिम एशिया में तनाव: पीएम मोदी कल मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे बैठक, देश में एलपीजी और तेल सप्लाई की होगी समीक्षा

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तेजी से बदलते हालातों और युद्ध की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा युद्ध के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विशेष रूप से एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ने वाले असर का आकलन करना है।
‘टीम इंडिया’ की भावना से निपटेंगे संकट से
प्रधानमंत्री इस बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल यानी ‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर देंगे। बैठक में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर फोकस रहेगा: एलपीजी और तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना। युद्ध के कारण प्रभावित हो रहे समुद्री रास्तों का विकल्प तलाशना। खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
नोट: जिन राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, वहां आचार संहिता के कारण मुख्यमंत्री की जगह मुख्य सचिव शामिल होंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और भारत की स्थिति
ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को अधिकांश देशों के लिए बंद कर दिया है। हालांकि, भारत के लिए राहत की बात यह है कि उसे फिलहाल इससे अलग रखा गया है। इसके बावजूद, वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए सरकार किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतना चाहती, क्योंकि देश में एलपीजी की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
देश के पास 60 दिनों का तेल भंडार: सरकार ने कहा- ‘अफवाहों पर न दें ध्यान’
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सरकार के अनुसार: पर्याप्त स्टॉक: भारत के पास वर्तमान में 60 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। रणनीतिक तैयारी: भारत की कुल भंडारण क्षमता 74 दिनों की है। अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल का आयात पहले ही सुनिश्चित कर लिया गया है। विविध स्रोत: भारत केवल एक रास्ते पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह 40 से अधिक देशों से तेल खरीद रहा है। रिफाइनरी क्षमता: देश की रिफाइनरी अपनी पूरी क्षमता से अधिक पर काम कर रही हैं, ताकि घरेलू मांग पूरी की जा सके।
जनता से अपील
सरकार ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे ईंधन की कमी से जुड़ी किसी भी तरह की अटकलों या अफवाहों पर ध्यान न दें। देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित है।




