कृष्ण जन्माष्टमी 2026: 3 या 4 सितंबर? दूर हुआ तारीख का भ्रम, जानिए निशिता पूजा मुहूर्त और रोहिणी नक्षत्र का समय

4 सितंबर को मनेगा भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, मध्यरात्रि में पूजा-अर्चना के लिए मिलेगा 46 मिनट का शुभ समय

नई दिल्ली। 29 अगस्त 2026। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी देशभर में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाने की तैयारियां जारी हैं। इस वर्ष पर्व की तारीख को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पंचांग गणना से स्पष्ट हो गई है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और मध्यरात्रि निशिता काल की प्रधानता के चलते जन्माष्टमी का व्रत व मुख्य जन्मोत्सव 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग
पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से प्रारंभ होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। वहीं भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ा रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात 12:29 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 11:04 बजे तक प्रभावी रहेगा। मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का यह संयोग जन्मोत्सव पूजन के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
निशिता पूजा के लिए मिलेगा 46 मिनट का समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कान्हा का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर निशिता काल की पूजा का सर्वाधिक महत्व है। 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की मध्यरात्रि 12:43 बजे तक कुल 46 मिनट का निशिता पूजा मुहूर्त रहेगा। इस दौरान भक्त लड्डू गोपाल का पंचामृत अभिषेक, नयनाभिराम श्रृंगार और माखन-मिश्री व पंजीरी का भोग लगाकर शंख-घंटियों के साथ जन्मोत्सव की आरती करेंगे।
व्रत पारण का समय
जन्माष्टमी का निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखने वाले श्रद्धालु जन्मोत्सव पूजन के उपरांत अथवा अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पारण कर सकते हैं। पंचांग के अनुसार 5 सितंबर की सुबह 6:01 बजे के बाद व्रत का पारण करना शास्त्रसम्मत रहेगा। विभिन्न क्षेत्रों में पंचांगीय समयानुसार इसमें आंशिक अंतर संभव है, अतः स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके साथ ही अगले दिन मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर पारंपरिक दही-हांडी उत्सव का आयोजन होगा।





