घी के मालपुए नहीं परोसे तो 43 परिवारों का बहिष्कार! राजस्थान के सिरोही का मामला चर्चा में

अंतिम संस्कार भोज में परंपरा नहीं निभाने पर पंचों का फरमान, पीड़ित परिवारों ने राशन, पानी और रोजगार से वंचित किए जाने का लगाया आरोप
🔴 Aaj Ki Baat News | राजस्थान
राजस्थान के सिरोही जिले से सामाजिक बहिष्कार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि अंतिम संस्कार के बाद आयोजित भोज में घी के मालपुए नहीं परोसे जाने पर एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। इतना ही नहीं, उस परिवार का समर्थन करने वाले 42 अन्य परिवारों को भी सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण पारंपरिक रूप से परोसे जाने वाले घी के मालपुए नहीं बनवा सका। इसके बाद समाज के कुछ पंचों ने इसे परंपरा के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई की और बहिष्कार का निर्णय लिया।
राशन, पानी और काम मिलने में परेशानी का आरोप
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि बहिष्कार के बाद उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी की गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं। उनका कहना है कि स्थानीय दुकानदार राशन देने से इनकार कर रहे हैं, गांव के कुएं से पानी भरने नहीं दिया जा रहा है और खेत मालिक भी काम देने से बच रहे हैं। पीड़ित परिवारों के अनुसार सामाजिक दबाव के कारण वे सार्वजनिक कार्यक्रमों और पारिवारिक आयोजनों में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
शादी समारोह में भी नहीं हो सके शामिल
प्रभावित लोगों का कहना है कि बहिष्कार का असर सामाजिक संबंधों पर भी पड़ रहा है। एक पीड़ित ने बताया कि रिश्तेदार की शादी होने के बावजूद वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सका, क्योंकि बहिष्कार तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाए जाने की चेतावनी दी गई थी।
11 हजार रुपये जुर्माने की चर्चा
स्थानीय स्तर पर जारी कथित आदेश में यह भी कहा गया है कि बहिष्कार का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और समुदाय को भोज देना होगा। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई है, इसे लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
सामाजिक बहिष्कार पर उठे सवाल
यह मामला सामने आने के बाद सामाजिक बहिष्कार जैसी प्रथाओं पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे मानवाधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग उठ रही है।




