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इमरजेंसी लगाने वाले खत्म हो गए, लोकतंत्र नहीं’: अमित शाह ने विपक्ष को याद दिलाया इतिहास, आरक्षण पर दी सफाई

दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व और जातीय जनगणना पर फैलाए जा रहे ‘नैरेटिव’ को गृह मंत्री ने आंकड़ों के साथ किया ध्वस्त

नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के भाषण के बाद मोर्चा संभालते हुए शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी की शक्ति कम करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाना है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।

दक्षिण के राज्यों की शक्ति कम नहीं, बढ़ेगी
विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे ‘दक्षिण बनाम उत्तर’ के नैरेटिव पर प्रहार करते हुए अमित शाह ने कहा कि परिसीमन के बाद दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व पहले से बेहतर होगा। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कर्नाटक की सीटें 28 से बढ़कर 42 और आंध्र प्रदेश की सीटें 25 से बढ़कर 38 हो जाएंगी। वर्तमान में सदन में दक्षिण के 129 सांसद (23.76%) हैं, जो भविष्य में बढ़कर 150 (23.97%) हो जाएंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कल विस्तार से केजी के बच्चों की तरह समझा दूंगा, बशर्ते विपक्ष वॉकआउट न करे।”

जातीय जनगणना पर दोटूक: ‘होकर रहेगी गिनती’
जातीय जनगणना के मुद्दे पर सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस पर निर्णय ले चुकी है और जनगणना होकर रहेगी। उन्होंने भ्रम दूर करते हुए बताया कि वर्तमान में इमारतों की गिनती का काम चल रहा है, और जब इंसानों की गिनती शुरू होगी, तब जाति का डेटा भी दर्ज किया जाएगा।

लोकतंत्र की ताकत और इमरजेंसी का सबक
विपक्ष द्वारा लोकतंत्र खत्म होने के आरोपों पर शाह ने इतिहास याद दिलाया। उन्होंने कहा, “130 करोड़ के जनमत को कोई मैनिपुलेट नहीं कर सकता। इस देश से लोकतंत्र को खत्म करने की ताकत किसी में नहीं है। जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान ऐसा प्रयास किया था, जनता ने उन्हें ही खत्म कर दिया, लेकिन लोकतंत्र आज भी अडिग है।” उन्होंने परिसीमन आयोग की निष्पक्षता पर भी जोर देते हुए कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है और पुरानी पारदर्शी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
अखिलेश यादव पर चुटकी लेते हुए शाह ने कहा कि परिसीमन से किसी को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह संवैधानिक और न्यायसंगत प्रक्रिया के तहत संपन्न होगा।

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