बड़ी खबर: लोकसभा में गिर गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 850 सीटें करने का प्रस्ताव खारिज

दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने से अटका बिल, सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े अन्य दो विधेयक भी लिए वापस
नई दिल्ली: भारतीय संसदीय इतिहास में शुक्रवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 वोटिंग के दौरान गिर गया। इस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने के लिए आवश्यक ‘दो-तिहाई बहुमत’ नहीं मिल सका, जिसके बाद सरकार को महिला आरक्षण से जुड़े दो अन्य संबंधित विधेयकों को भी वापस लेना पड़ा।
वोटिंग का गणित: 54 वोटों से चूकी सरकार
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देर शाम वोटिंग के नतीजों की घोषणा करते हुए बताया कि सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या के आधार पर बिल को बहुमत नहीं मिला।
- कुल पड़े वोट: 528
- पक्ष में वोट: 298
- विपक्ष में वोट: 230
- जरूरी जादुई आंकड़ा: 352 (दो-तिहाई बहुमत)
- परिणाम: बिल पारित होने के लिए 352 वोटों की दरकार थी, लेकिन पक्ष में केवल 298 वोट ही पड़े। इस तरह बिल 54 वोटों के अंतर से गिर गया।
विधेयक में क्या था प्रस्ताव?
131वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत संसद के स्वरूप को पूरी तरह बदलने की तैयारी थी:
- सीटों का विस्तार: लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।
- विभाजन: इसमें राज्यों से 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सीटें तय की गई थीं।
- उद्देश्य: इसे महिला आरक्षण और नए परिसीमन को लागू करने की दिशा में एक बुनियादी कदम माना जा रहा था।
21 घंटे की चर्चा और 130 सांसदों के विचार
विशेष सत्र के दौरान इन बिलों पर करीब 21 घंटे तक मैराथन बहस चली। चर्चा में कुल 130 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिनमें 56 महिला सांसद शामिल थीं। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इन विधेयकों को सदन के पटल पर रखा था, लेकिन विपक्ष की असहमति के चलते मुख्य बिल गिर गया।
वापस लिए गए अन्य दो विधेयक
मुख्य संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सरकार ने अन्य दो संबंधित बिल भी वापस ले लिए:
- परिसीमन संशोधन विधेयक, 2026: इसमें परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रस्ताव था।
- केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, 2026: यह दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में महिला आरक्षण लागू करने के लिए कानूनों में बदलाव से जुड़ा था।
अगला कदम क्या?
लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संविधान संशोधन की विशेष प्रक्रिया पूरी न होने के कारण यह विधेयक पारित नहीं माना जाएगा। अब सरकार को इन सुधारों के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी होगी या विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने का प्रयास करना होगा।




