डॉ. शांभवी सिंह को फार्मेसी में पीएचडी, जिले में हर्ष का माहौल

ग्लूकोमा उपचार पर नवाचारपूर्ण शोध को मिला पेटेंट कार्यालय से मान्यता
जांजगीर-चांपा। जिले के लिए यह गर्व और प्रसन्नता का विषय है कि नगर की होनहार बेटी डॉ. शांभवी सिंह को मंदसौर विश्वविद्यालय द्वारा फार्मेसी विषय में पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) की उपाधि प्रदान की गई है। उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से जिले में खुशी और गौरव का वातावरण है।
डॉ. शांभवी सिंह ने अपने शोध कार्य में ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) रोग के उपचार में प्रयुक्त एंटी-ग्लूकोमा औषधियों पर गहन एवं नवाचारपूर्ण अध्ययन किया है। उनका यह शोध फार्मेसी और नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय माना जा रहा है। विशेष बात यह है कि इस शोध को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त हुई है, जिससे इसके वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व में और वृद्धि हुई है।
अपनी सफलता पर डॉ. शांभवी सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के निरंतर सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर परिश्रम से किसी भी सपने को साकार किया जा सकता है।
डॉ. शांभवी सिंह प्रारंभ से ही मेधावी और परिश्रमी छात्रा रही हैं। वे पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय की होनहार छात्रा के रूप में जानी जाती रही हैं और शुरू से ही अध्ययन के प्रति समर्पित रही हैं।
उनके पति वार्ड क्रमांक 23 निवासी मुकेश सिंह राणा वर्तमान में बालोद जिले में पुलिस विभाग में थाना प्रभारी (एस.एच.ओ.) के पद पर पदस्थ हैं।
परिवारजनों ने इस अवसर पर कहा कि डॉ. शांभवी सिंह की यह उपलब्धि न केवल परिवार बल्कि पूरे जांजगीर जिले के लिए प्रेरणादायक है और यह सिद्ध करती है कि संकल्प और मेहनत के बल पर बेटियाँ हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी डॉ. शांभवी सिंह की उपलब्धि को जिले की बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत बताते हुए कहा कि उनका शोध भविष्य में नेत्र रोगों के उपचार के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
जिले के ठाकुर क्षत्रिय समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने डॉ. शांभवी सिंह को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।





